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'गैस नहीं मिल रही, कंपनी बंद हो रही है...', लॉकडाउन की तरह गांव लौट रहे लोग

औद्योगिक शहरों में गैस की कमी के चलते अब कामगार परेशान हो रहे हैं। गुजरात के सूरत शहर में काम करने वाले तमाम कामगार अब अपने घरों को लौटने लगे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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देश में गैस की किल्लत का असर अब उन शहरों में दिखने लगा है जहां प्रवासी कामगार रहते हैं। कई शहरों में गैस न मिल पाने के चलते वहां के कामगार ठीक उसी तरह अपने घर लौटने लगे हैं जैसे लॉकडाउन के समय लौटे थे। गुजरात के सूरत में शुक्रवार को कई कामगारों ने बताया कि लंबे समय से गैस नहीं मिल पा रही है और कई फैक्ट्रियां भी बंद हो रही हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरन अपने घर लौटना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन पहुंचे कामगारों का कहना है कि कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है इसलिए वे अपने गांव लौट रहे हैं।

 

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि गैस की कोई कमी नहीं है। हालांकि, अब सिर्फ बुकिंग से ही गैस मिल रही है। अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के जो कामगार छोटे सिलेंडर भरवाते हैं, उन्हें बिल्कुल भी गैस नहीं मिल पा रही है। कालाबाजारी करने वाले लोग इसी का फायदा उठाकर 100 रुपये में मिलने वाली गैस 400 से 500 रुपये में बेच रहे हैं। इसी का नतीजा है कि कई शहरों के कामगार परेशान हो गए हैं और अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई शहरों की गैस आधारित फैक्ट्रियां भी बंद होने लगी हैं।

 

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क्या बोल रहे हैं गैस?

 

सूरत स्टेशन पर जुटे लोगों में एक कामगार ने बताया, 'गांव जा रहे हैं। दो-चार पांच रोज से गैस नहीं मिल रही है। धीरे-धीरे कंपनी भी बंद हो रही है। भूखे मर रहे हैं इसलिए गांव जा रहे हैं, क्या करें? 4-5 दिन से ज्यादा ही दिक्कत हो रही है। 400-500 रुपये लीटर गैस मिल रही है। कोशिश की लेकिन सब अपना-अपना देख रहे हैं। कोई मदद नहीं करता है। कंपनी में कोई आदमी नहीं जा रहा है। अब जब गैस चालू होगी तभी वापस आएंगे।'

 

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एक और महिला सीमा देवी ने बताया, 'गैस की दिक्कत की वजह से गांव जा रही हूं। पैसे नहीं मिल रहे हैं। 15 दिन से गैस नहीं मिल रही है। पैसे न होने की वजह से अकाउंट भी बंद हो रहा है। एजेंसी से भी नहीं मिल पा रही है। दो बच्चे यहीं छोड़ दिए हैं, मैं और मेरी बेटी जा रहे हैं। कुछ दिन से उपले से गैस बना रहे थे। गली-गली खोजने पर छोटा वाला सिलेंडर भी नहीं भरवा पा रहे हैं।'

 

बता दें कि कमर्शियल गैस को कम प्राथमिकता मिलने का असर यह हो रहा है कि सेरैमिक, सीमेंट और कांच जैसे उत्पाद बनाने वाली कंपनियां गैस पर आधारित होती हैं। गैस न मिलने की स्थिति में ये कंपनियां बंद हो रही हैं जिसके चलते दिहाड़ी करने वाले लोगों को काम भी नहीं मिल पा रहा है और पैसे की कमी के चलते उन्हें अपने घर लौटना पड़ रहा है।

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