टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होता है। ये बैक्टीरिया उन जगहों पर पनपते हैं जहां पर साफ-सफाई नहीं होती है।
साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया दूषित खाना और गंदा पानी पीने से शरीर में प्रवेश करता है। अगर समय पर टाइफाइड का इलाज नहीं किया जाए तो जानलेवा हो सकता है।
इस बीमारी में तेज बुखार, पेट दर्द और कमजोरी महसूस होती है। इस बीमारी का इलाज संभव है। ये लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।
इस बीमारी को लेकर कई मिथ्स हैं जिसके बारे में जागरूकता होना जरूरी है।
टाइफाइड में हल्का बुखार, सिरदर्द, पेट में दर्द की समस्या होती है। ज्यादातर लोग इन्हें मामूली समझकर इग्रोर करते हैं।
लोगों को लगता है कि टाइफाइड में भूख नहीं लगती है। हालांकि डॉक्टर्स भी कह चुके हैं कि हर व्यक्ति के भूख लगने की क्षमता अलग होती है। संक्रमण हो सकता है।
यह एक मिथ है। MoHFW ने साफ-साफ कहा है साफ घरों में भी पानी, कच्ची सब्जियां और बाहर का खाना खाने से संक्रमण हो सकता है।
कई लोग दवाई का पूरा कोर्स नहीं करते हैं। उन्हें लगता है कि बुखार नहीं आ रहा है तो बीमारी ठीक हो गई है। आप ऐसी गलती न करें।
लोगों को लगता है कि टाइफाइड की वैक्सीन लगवाने के बाद बीमारी नहीं होगी। WHO का कहना है कि वैक्सीन बैक्टीरिया के सभी स्ट्रेन से सुरक्षित नहीं रखता है।