तेल के लिए आयात पर निर्भरता, गाड़ियों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण के चलते भारत ने पिछले कुछ साल में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना शुरू किया है। इन गाड़ियों को बनाने वाली कंपनियों, पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों और खरीदने वाले ग्राहकों तक को अलग-अलग तरीकों से प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदें। इसका असर भी दिखा है और गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी भी है। इसकी तुलना में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बेहद कम है। ई-रिक्शा के मामले में तो ज्यादातर काम अवैध चार्जिंग स्टेशनों या प्राइवेट कनेक्शन के सहारे चल रहा है। वहीं, इलेक्ट्रिक कारों की संख्या की तुलना में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या काफी कम है। चीन और यूरोप में जहां पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 10 से 20 गाड़ी पर एक है, वहीं भारत में 235 गाड़ियों पर एक चार्जिंग स्टेशन है।
यह संख्या दिखाती है कि भारत इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या तो तेजी से बढ़ा रहा है लेकिन चार्जिंग स्टेशनों की संख्या पर्याप्त नहीं है। यह भी एक वजह है कि पिछले कुछ साल में तमाम कोशिशों के बावजूद लोग इलेक्ट्रिक कारों पर बहुत भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। बहुत सारे लोगों ने इलेक्ट्रिक कार खरीदी भी है तो उनके पास कम से एक और पेट्रोल/डीजल/CNG कार भी मौजूद है। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन प्रदूषण कम करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद नहीं मिल पा रही है।
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भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती संख्या, तेल की बढ़ती कीमतों और नीतियों में होते बदलाव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि 30 से 40 प्रतिशत गाड़ियां साल 2030 तक इलेक्ट्रिक हो जाएंगी। दिल्ली सरकार ने हाल ही में एलान किया है कि 2028 के बाद तेल से चलने वाले दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा और इलेक्ट्रिक कार पर सब्सिडी दी जाएगी। अगर आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी नीतियां बनती हैं तो गाड़ियों की संख्या और बढ़ेगी और उनके साथ ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन की भी मांग बढ़ती जाएगी।
कितनी बढ़ी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या?
अप्रैल 2026 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने संसद में एक जवाब में बताया था कि देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। साल 2023 में जहां 88568 चारपहिया EV का रजिस्ट्रेशन हुआ तो 2024 में 1.63 लाख और 2025 में यह संख्या 3.02 लाख तक पहुंच गई। 2026 के सिर्फ 3 महीनों में ही 70 हजार से ज्यादा चारपहिया EVs का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। यह दिखाता है कि 3 साल में चारपहिया EVs की संख्या लगभग 4 गुना बढ़ गई है।
अगर हर तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों को देखें तो 2023 में कुल रजिस्टर हुए EVs की संख्या 9.81 लाख थी। 2024 में 13.60 लाख और 2025 में 16.28 लाख से ज्यादा EVs का रजिस्ट्रेशन हुआ और 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 3.77 लाख से ज्यादा EV रजिस्टर हुए।
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कितने हैं चार्जिंग स्टेशन?
अगर भारत में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या देखें तो भारत इस मामले में काफी पीछे है। 1 जुलाई 2022 तक भारत में सिर्फ 398 चार्जिंग स्टेशन थे जिसमें से 81 हाइवे पर थे। पिछले 4 साल में यह संख्या लगभग 50 हजार तक पहुंच गई है लेकिन गाड़ियों की संख्या की तुलना में यह काफी कम है।
अप्रैल 2026 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि 30 मार्च 2026 तक देश में कुल चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 49909 थी। इसमें प्राइवेट चार्जिंग स्टेशन भी शामिल हैं। इस डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 6577 चार्जिंग स्टेशन महाराष्ट्र में और 6480 चार्जिंग स्टेशन कर्नाटक में थे।
कहां हो रही चूक?
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की एक रिसर्च बताती है कि भारत में जो चार्जिंग स्टेशन हैं वे ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में हैं। हर महीने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं लेकिन चार्जिंग स्टेशन की कमी और बढ़ती जा रही है। इंडिया ब्रांड एक्विटी फाउंडेशन (IBEF) का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत के 9 बड़े शहरों में कम से कम 18-18 हजार चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी। अभी सबसे ज्यादा चार्जिंग स्टेशन महाराष्ट्र में हैं और इस अनुमान की तुलना में पूरे राज्य में ही इनकी भारी कमी है।
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वैश्विक स्तर पर देखें तो दुनिया के तमाम देशों में EV और चार्जिंग स्टेशन का 1:6-20 है जबकि भारत में 1:235 है। हैरानी की बात है कि भारत में कई चार्जिंग स्टेशन ऐसे भी हैं जो काम ही नहीं करते हैं। ORF की रिपोर्ट बताती है कि 14008 चार्जिंग स्टेशन ही ऐसे थे जो टाइप 2 चार्जर को सपोर्ट करते हैं और लगभग 4565 चार्जिंग स्टेशन तो बंद थे। तमिलनाडु में तो 90 प्रतिशत चार्जिंग स्टेशऩ ऐसे थे जो कुछ किलोमीटर के दायरे में ही थे। बंद बड़े चार्जिंग स्टेशन में सबसे ज्यादा दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में ही थे।
चार्जिंग स्टेशन कम लगने का एक बड़ा कारण गाड़ियों की संख्या और उनकी अलग-अलग चार्जिंग जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग कंपनियों की कारों में चार्जर और बैटरी पैक अलग होते हैं तो सबको एक जैसे चार्जर से चार्ज नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशन से होने वाली कमाई और उसके लिए जरूरी आधारभूत ढांचे को लेकर भी अभी स्पष्टता नहीं है। सरकार ने पहले ही AC चार्जिंग के लिए 2.5 से 3.5 रुपये प्रति यूनिट और DC चार्जिंग के लिए 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट का दाम तय कर दिया है। इसके चलते भी चार्जिंग स्टेशन बनाने में लोगों की रुचि कम दिख रही है।
पेट्रोल पंप की तरह चार्जिंग स्टेशन बनाने और उसके लिए जमीन खरीदने पर होने वाला खर्च भी एक बड़ी समस्या माना जा रहा है। साथ ही, लागत की तुलना में कम कमाई, लगातार बदलती टेक आदि भी कारण हैं जिनके चलते लोग इस क्षेत्र में कम उतर रहे हैं।


