चौतरफा हमले झेल रहे ईरान ने अब दोटूक कह दिया है कि अब होर्मुज स्ट्रेट बंद है और इससे गुजरने वाले जहाज जला दिए जाएंगे। ईरान के इस फैसले और पश्चिमी एशिया में मचे बवाल के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। कहा जा रहा है कि अगर संघर्ष जारी रहता है तो आने वाले कुछ ही दिनो में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसे में चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि क्या भारत में डीजल-पेट्रोल के दाम भी बढ़ जाएंगे? तेल संबंधी जरूरतों के लिए अरब के देशों के अलावा कई अन्य देशों पर आश्रित भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

 

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में से 9 से 10 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। अब कच्चे तेल के एक बैरल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने वाली है। अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत शुक्रवार को 67 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन अब यह 72.79 डॉलर प्रति बैरल हो चुकी है। ऐसे में भारत समेत कई देशों में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार भी इसके लिए शिपिंग कंपनियों, तेल कंपनियों आदि से बातचीत कर रही है।

 

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भारत इतना परेशान क्यों?

 

भारत में जितने तेल की जरूरत पड़ती है, उसका 88 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से ही आता है। कच्चे तेल को लाकर भारत की रिफाइनरियों में डीजल और पेट्रोल जैसे पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं। भारत में आज भी ज्यादातर गाड़ियां, फैक्ट्रियां और कई बड़े प्लांट ऊर्जा जरूरतों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर हैं ऐसे में पश्चिमी एशिया में बनी स्थिति भारत के कारोबारी वर्ग को परेशान कर रही है।

भारत में डीजल-पेट्रोल महंगा होगा या नहीं?

 

सबसे बड़ा सवाल तो यही है क्योंकि आम नागरिक सबसे ज्यादा इस्तेमाल डीजल, पेट्रोल, सीएनजी या पीएनजी का ही करता है। PTI की एक रिपोर्ट की मानें तो जिस तरीके से तेल के दाम बढ़ रहे हैं उसके चलते डीजल और पेट्रोल के दाम में तुरंत कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है। 

 

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PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार तेल बेचने वाली कंपनियों को उस समय मार्जिन बढ़ाने का मौका दे रही है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दाम कम होती हैं। ऐसे में जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तब यही कंपनियां अपना मार्जिन कम कर लेती हैं और इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ता। उदाहरण के लिए- समझिए कि अगर कंपनियों को कच्चा तेल सस्ता यानी सिर्फ 10 रुपये में मिल रहा हो और आप 50 रुपये में खरीद रहे हों तो कंपनी का मार्जिन 40 रुपये हुआ। इस स्थिति में आपको तेल सस्ता नहीं मिलेगा लेकिन कंपनियां मुनाफा कमा लेंगी। अब जब तेल महंगा हुआ यानी मान लीजिए कंपनियों ने 30 रुपये में खरीदा तो कंपनियां तेल के दाम नहीं बढ़ाएंगी और कम मार्जिन से काम चला लेंगी। इसका फायदा यह होगा कि ग्राहक को इस स्थिति में भी तेल उतने में ही मिलता रहेगा जितने में पहले मिल रहा था। 

अभी क्या स्थिति है?

 

आपको बता दें कि साल 2022 के अप्रैल महीने से लेकर अब तक भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतों में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इस समय में सरकारी कंपनियों जैसे कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को तब नुकसान हुआ जब कच्चा तेल महंगा हुआ। हालांकि, जब कच्चा तेल सस्ता हुआ तो इन्हीं कंपनियों ने अच्छा मुनाफा भी कमाया लेकिन लोगों को मिलने वाले तेल के दाम में बदलाव नहीं हुआ।

 

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PTI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार इसी नीति पर आगे बढ़ना चाहती है ताकि तेल के दाम बढ़ने का असर जनता पर न हो। खासकर ऐसे समय में सरकार ऐसा रिस्क बिल्कुल नहीं उठाना चाहेगी जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इन पांच में से सिर्फ एक राज्य में ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार है। अगर तेल के दाम बढ़ते हैं तो चुनाव के समय विपक्ष को एक आसान मुद्दा मिल सकता है।