वर्क इंडिया और नौकरी जॉब स्पीक इंडेक्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के जॉब मार्केट में एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ व्हाइट कॉलर जॉब्स यानी कॉर्पोरेट ऑफिसों में नौकरियां बढ़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ ब्लू कॉलर जॉब्स यानी मजदूरी या अनस्किल्ड या छोटे स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह में तेजी से उछाल आया है। वर्क इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी 2026 में व्हाइट कॉलर जॉब मार्केट में नौकरियों में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ नौकरी जॉब स्पीक इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शारीरिक श्रम करने वाले कामगारों की तनख्वाह सालाना 8.60 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जो व्हाइट कॉलर जॉब्स में होने वाली बढ़ोतरी से ज्यादा है।

 

ब्लू कॉलर सेक्टर, जिसमें फैक्ट्री वर्कर्स, टेक्नीशियन, ड्राइवर और फील्ड वर्कर्स शामिल हैं, वहां कंपनियां अब ज्यादा सैलरी देकर कामगारों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही हैं। इसके पीछे मुख्य वजह श्रमिकों की कमी और बढ़ती मांग है। इंडस्ट्रीज को काम के लिए लोगों की जरूरत है लेकिन वर्कफोर्स नहीं मिल रही है, जिस वजह से वेतन में इजाफा करना पड़ रहा है।

 

जबकि, व्हाइट कॉलर जॉब मार्केट में अलग तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां कंपनियां बड़ी संख्या में भर्तियां तो कर रही हैं लेकिन उन लोगों को जिनके पास डिग्री के अलावा खास स्किल्स हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और आईटी जैसे क्षेत्रों में स्किल्ड प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। यानी अब सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं है, बल्कि जरूरी स्किल्स होना अहम् हो गया है। अब सवाल उठता है कि ब्लू कॉलर जॉब्स की सैलरी बढ़ने की वजह क्या है?

 

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रिपोर्ट में दावा

वर्कइंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ब्लू कॉलर कर्मचारियों की न्यूनतम तनख्वाह 14,056 रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 15,756 रुपये हो गई। जबकि व्हाइट कॉलर कर्मचारियों की शुरुआती तनख्वाह 14,760 रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 15,756 रुपये हो गई। दोनों की तुलना से साफ है कि व्हाइट कॉलर की सैलरी में होने वाला इजाफा ब्लू कॉलर जॉब की तुलना में कम है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि डिलीवरी बॉय, कैब व अन्य ड्राइवर की सैलरी में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं कारखानों में काम करने वालों की तनख्वाह 11 फीसदी बढ़ी है।

 

ऐसा देश में उपभोक्ता सेवाओं की तेजी से मांग बढ़ने के कारण हुआ है। चूंकि काम करने वाले लोगों की संख्या की तुलना में मांग ज्यादा है इस इस क्षेत्र में सैलरी भी बढ़ी है। इसके उलट, व्हाइट कॉलर जॉब्स में कंपनियां ज्यादा लोगों को हायर कर कम सैलरी में काम करा रही हैं।

 

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व्हाइट कॉलर में बढ़ी हायरिंग

नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट कॉलर जॉब्स में फरवरी में हायरिंग बढ़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में सालाना हायरिंग 12 फीसदी बढ़ी है जो फरवरी 2025 के 2,890 से बढ़कर फरवरी 2026 में 3,233 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट सेक्टर में अच्छे स्किल वाले लोगों को नौकरी पर रखा गया है। कॉर्पोरेट जॉब्स में फ्रेशर्स को भी नौकरी दी गई है। फ्रेशर्स की भर्ती में 17 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि 20 लाख रुपये सालाना से ज्यादा सैलरी वाली नौकरियों की मांग 23 फीसदी बढ़ गई है।


आईटी सेक्टर में काम करने वाली भारतीय मल्टी नेशनल कंपनियों (एमएनसी) में सालाना आधार पर 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि व्हाइट कॉलर नौकरियों में भर्ती में तेजी आई है। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरियां तो मिल रही हैं लेकिन अपेक्षा के मुताबिक सैलरी नहीं बढ़ रही।

 

इस बदलाव ने जॉब मार्केट को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक ओर ब्लू कॉलर नौकरियां हैं, जहां स्किल कम लेकिन मांग ज्यादा होने के कारण वेतन तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी ओर व्हाइट कॉलर नौकरियां हैं, जहां अवसर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तेज हो गई है और केवल योग्य उम्मीदवार ही इन अवसरों का लाभ उठा पा रहे हैं।