इन दिनों डीजल और पेट्रोल के लिए पेट्रोल पंपों पर खूब लाइन लग रही है। सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि कोई कमी नहीं है लेकिन यह बात जमीन तक कम पहुंच रही है। इसी बीच अब केंद्र सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने का फैसला किया है। दोनों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती की गई है। इसके चलते डीजल पर अब 0 एक्साइज ड्यूटी लगेगी और पेट्रोल पर सिर्फ 3 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लगेगी। इस कटौती का असर ग्राहकों को मिलने वाले डीजल-पेट्रोल के दाम पर तुरंत नहीं पड़ेगा लेकिन आने वाले समय में दाम में बढ़ोतरी होने की आशंका भी कम रहेगी।

 

सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से निपटने में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी तेल कंपनियों की मदद करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। वित्त मंत्रालय की ओर से 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

 

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मंत्रालय ने कहा है कि यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। दरअसल, भारत में तेल कंपनियां दबाव में हैं क्योंकि अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं।

 

क्या है डीजल-पेट्रोल का गणित?

दरअसल, पिछले कुछ समय से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) को सरकार की ओर से राहत मिली हुई है कि सस्ता कच्चा तेल मिलने पर उन्हें तेल के दाम कम नहीं करने पड़ते। इसका फायदा होता है कि उनका मार्जिन बढ़ जाता है। इसके पीछे का मकसद यही है कि जब कच्चे तेल के दाम बढ़ें तब भी आम ग्राहकों को मिलने वाले डीजल-पेट्रोल का दाम न बढ़ाया जाए। फरवरी से जारी संकट के बावजूद इसी वजह से डीजल-पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाएंगे। हालांकि, अब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती जा रही हैं और सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। इसी के चलते सरकार ने इन कंपनियों को राहत दी है ताकि इसका बोझ आम लोगों के साथ-साथ कंपनियों पर भी न पड़े।

 

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मौजूदा वक्त में कच्चे तेल की ज्यादा कीमत के चलते एक लीटर डीजल या पेट्रोल पर तेल कंपनियों को 48.8 रुपये का नुकसान हो रहा है। एक्साइज ड्यूटी घटने का असर होगा कि कंपनियों को होने वाला यह नुकसान कम हो जाएगा। 

 

दरअसल, आपको लगभग 100 रुपये में मिलने वाले तेल की कीमत में इसकी असली कीमत 50-55 रुपये होती है। इसमें डीलर का कमीशन 3 से 4 रुपये तक होता है। केंद्र सरकार डीजल और पेट्रोल पर अलग-अलग एक्साइज ड्यूटी लेती है। इसके बाद राज्य सरकारें वैट लगाती है। इसी के चलते डीजल-पेट्रोल की कीमत 90 से 100 रुपये लीटर तक पहुंच जाती है। अब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी है जिसके चलते कंपनियों को राहत मिलेगी। अगर राज्य सरकारें वैट घटा दें तब आम ग्राहकों को भी डीजल और पेट्रोल सस्ता मिल सकता है। हालांकि, ऐसा किए जाने की उम्मीद बेहद कम है।

 

 

 

 

डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने के साथ ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले तेल पर एक नई स्पेशल अडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगा दी गई है। इस पर 29.5 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त देने होंगे। साथ ही, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके बारे में कहा है, 'इससे घरेलू इस्तेमाल के लिए इन उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी।'