आजकल थोड़ी‑थोड़ी बचत करने वाला मिडिल‑क्लास रोजमर्रा की जिंदगी में इतना उलझा हुआ है कि उसके दिमाग में सबसे ज्यादा यही सवाल घूमता रहता है कि 'मैं इतना मेहनत से पैसा कमाता हूं, फिर भी अंत में हाथ में कुछ खास बचता क्यों नहीं? मेरा पैसा आखिर जा कहां जा रहा है?' सैलरी के दिन जैसे ही अकाउंट में रकम आती है, अगले ही दो‑तीन दिन में ही उसका बहुत बड़ा हिस्सा गायब होने लगता है।
बैंक अपने आप EMI ऑटो‑डेबिट कर लेता है, इंश्योरेंस, बिजली/गैस बिल, मोबाइल रिचार्ज, नेटफ्लिक्स/प्राइम जैसी सब्सक्रिप्शन सबके पैसे कट जाते हैं। स्विगी‑जोमैटो से फूड, ऑटो/कैब से ट्रांसपोर्ट, शॉपिंग ऐप से खरीदारी, ऑनलाइन कोर्स और सब्सक्रिप्शन तक के पैसे कट जाते हैं। इस तरह सैलरी आते ही पैसा खत्म हो जाता है। लोग अपने अकाउंट में बस नंबर घटते देखते हैं लेकिन उसे कंट्रोल कर पाना काफी मुश्किल होता है।
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EMI का बोझ
EMI (Equated Monthly Instalment) यानी बड़ा लोन ले लिया और अब हर महीने एक बराबर रकम चुकानी है। आज लगभग 70% आईफोन और 80% नई कारें EMI पर ही खरीदी जाती हैं। जिनमें ज्यादातर हिस्सा मिडिल‑क्लास का ही है। कई मिडिल‑क्लास घरों की आय का 30–33% तो हर महीने सिर्फ EMI और लोन चुकाने में चला जाता है और लगभग 45% फैमिली अपनी आय का 40% से ज्यादा लोन और क्रेडिट पर खर्च कर रही हैं। यानी EMI ने मिडिल‑क्लास के पैसे को वहीं रोक लिया जहां से वह बचत बनकर आगे नहीं चल पा रहा।
क्रेडिट और फिनटेक
क्रेडिट कार्ड पर कुल बकाया और डिफॉल्टर्स की संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है। बहुत से यूजर्स पूरा क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भर पाते, जिससे बची हुई रकम पर ज्यादा ब्याज लगकर यह छोटा‑सा बिल बड़े कर्ज में बदल जाता है। इसके साथ‑साथ फिनटेक लोन ऐप्स ने भी एक नया ट्रेंड बना दिया है 'कुछ सेकंड में लोन', 'कम KYC', 'No‑Cost EMI' जैसी सुविधाएं देकर लोग बार‑बार छोटे‑छोटे लोन लेने लगे हैं, जिन पर ब्याज बहुत ज्यादा होता है। इन सबकी वजह से क्रेडिट कार्ड और फिनटेक लोन मिलाकर मिडिल‑क्लास की बचत हर साल और तेजी से घट रही है, जबकि दिखावा और खर्च बढ़ता ही जा रहा है।
SIP और निवेश कल्चर
SIP (Systematic Investment Plan) यानी हर महीने थोड़ा‑थोड़ा पैसा म्यूचुअल फंड या दूसरी योजनाओं में डालना। SIP में निवेश पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है। 2023 में पूरे साल की SIP लगभग 1.84 लाख करोड़, 2024 में यह लगभग 2.68 लाख करोड़ हो गई, और 2025 में पूरे साल की SIP रकम लगभग 3.34 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। NDTV और DD News बताते हैं कि नौ सालों में SIP निवेश लगभग 8 गुना बढ़ चुका है और हर महीने की SIP कलेक्शन भी लगभग 29,000 से 31,000 करोड़ तक पहुंच गई है। यानी आज मिडिल‑क्लास का पैसा न सिर्फ कर्ज चुकाने में फंसा हुआ है, बल्कि एक अच्छा हिस्सा फ्यूचर‑निवेश के नाम पर भी बांध दिया गया है।
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बचत गिर रही, जबकि दिखावा बढ़ रहा
EMI, क्रेडिट कार्ड, फिनटेक लोन और SIP ने मिडिल‑क्लास के पास से पैसे को इस तरह फिल्टर कर दिया है कि ज्यादातर पैसा या तो कर्ज चुकाने में जा रहा है या भविष्य के लिए बांध दिया जा रहा है और बची हुई छोटी सी रकम रोजमर्रा की जरूरतों पर सिमट जाती है। इसका असर यह है कि बाहर से जीवन आधुनिक और स्टाइलिश लगता है लेकिन अंदर से कर्ज और बिलों का दबाव बढ़ रहा है। इसलिए आज मिडिल‑क्लास के लिए असली चुनौती यह नहीं कि 'कितना कमाते हैं', बल्कि यह है कि EMI, क्रेडिट कार्ड, फिनटेक लोन और SIP को समझकर अपने पैसे को अपने हाथ में कैसे रखना है, ताकि जिंदगी सिर्फ कर्ज चुकाने और बिल भरने तक ही सिमटकर न रह जाए।
