भारत ने पिछले कुछ समय में रूस से तेल खरीदना कम किया है। अब कच्चे तेल की नई खेप वेनेजुएला से आ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ही समय में वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल भारत आ सकता है। इसके लिए बड़े-बड़े क्रूड कैरियर किराए पर लिए गए हैं। रोचक बात है कि 2019 में अमेरिका की ओर से बैन लगने से पहले वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने के मामले में भारत तीसरे नंबर पर हुआ करता था। अब एक बार फिर से भारत ने वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की शुरुआत कर दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह तेल रूस के तेल से सस्ता होगा या नहीं?

 

हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका सेना के जवान पकड़कर ले गए थे। उसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि अब इस देश में उनका शासन चलेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने ही भारत-वेनेजुएला डील की पहल भी की थी और अब इसी के तहत भारत वेनेजुएला से तेल खरीद रहा है। ट्रंप कई बार यह भी कह चुके हैं कि उनके कहने पर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है।

 

यह भी पढ़ें: 'अपनी समस्याओं पर ध्यान दें तो...', भारत की अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को धो डाला

कौन सा तेल सस्ता पड़ेगा?

 

दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका चाहता है कि रूस अब अपने कदम पीछे खींच ले। रूस इस पर तैयार नहीं है इसलिए यूरोप और अमेरिका उस पर दबाव बना रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगा दिया है। यूरोपियन यूनियन ने भी रूसी क्रूड ऑयल को रिफाइन करके तैयार किए गए उत्पादों पर बैन लगा दिया गया है।

 

CareEdge रेटिंग्स का इसके बारे में अनुमान है, 'रूसी क्रूड ऑयल से दूरी बनाने और वेनेजुएला, अमेरिका और मिडिल ईस्ट से कच्चा तेल लेने पर भारत का प्रति बैरल खर्च 1.5 से 2 डॉलर बढ़ जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों का मार्जिन कम होगा।' इस बारे में CareEdge के डायरेक्टर हार्दिस शाह कहते हैं कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें पहले की तुलना में ज्यादा हो सकती हैं।

 

यह भी पढ़ें: '2 रशियन महिलाओं से संबंध', एपस्टीन फाइल्स पर बिल गेट्स का कबूलनामा, मांगी माफी

 

बता दें कि ग्लोबल रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) वित्त वर्ष 2024 में 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल था जो कि वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4 से 6 डॉलर प्रति बैरल और फरवरी 2026 की पहली तिमाही में और घटकर सिर्फ 2 से 4 डॉलर प्रति बैरल रह गया। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में थोड़ी बढ़ोतरी हुई और यह 8 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा और तीसरी तिमाही में 9 से 13 डॉलर तक पहुंच गया। 

SBI की रिपोर्ट क्या कहती है?


 हाल ही में इसी बारे में SBI की भी एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट का आकलन है कि अगर भारत वेनेजुएला से तेल खरीदता है तो वह लगभग 300 करोड़ डॉलर यानी लगभग 2700 करोड़ से ज्यादा रुपये बचा सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरत यह होगी कि भारत को प्रति बैरल पर 10 से 12 डॉलर का जिस्काउंट मिले। मौजूदा वक्त में वेनेजुएला के क्रूड ऑयल की कीमत 51 डॉलर प्रति बैरल है। इस केस में समस्या यह है कि वेनेजुएला की भारत से दूरी रूस की तुलना में दोगुना ज्यादा है। 

 

यह भी पढ़ें: तकनीक से दाम तक, सेब कारोबार में विदेशी 'घुसपैठ' के खतरे क्या हैं?

 

इसके अलावा, रूस के कच्चे तेल की क्वालिटी और वेनेजुएला के तेल की क्वालिटी में भी अंतर है। ऐसे में कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए रिफाइनरी में भी बदलाव करने पड़ सकते हैं। अब वेनेजुएला का कच्चा तेल भले ही 51 डॉलर प्रति बैरल में मिले और रूसी तेल 61 से 65 डॉलर में मिले। यहां भारत को ट्रांसपोर्टेशन पर भी काफी खर्च करना होगा।