अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग और पश्चिम एशिया की अस्थिरता का असर अब सोने और चांदी के कारोबार पर भी पड़ रहा है। चांदी का आयात को आसान बनाने के लिए सरकार ने अब तक इसे वैश्विक बाजार में 'मुक्त श्रेणी' में रखा था, अब चांदी को 'प्रतिबंधित श्रेणी' डाल दिया है।
चांदी, अब फ्री कैटेगरी से रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी तक पहुंच गई है। अब चांदी आयात करने के लिए सरकार की अनुमति या लाइसेंस जरूरी है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अप्रैल महीने में चांदी के आयात में पिछले साल की तुलना में 157.16 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई थी।
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क्यों लिया गया है ऐसा फैसला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि अनावश्यक विदेश यात्रा न करें और एक साल तक सोना न खरीदें। इससे पहले बुधवार को सरकार ने सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाकर 6 फीसदी से 15 प्रतिशत कर दिया था। इसका मकसद आयात कम करना और विदेशी मुद्रा को जरूरी चीजों जैसे पेट्रोलियम और खाद के लिए बचाना है।
सरकार का आदेश क्या है?
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है। अब इस विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी किया है कि'हार्मोनाइज्ड सिस्टम कोड, HAS 71069221 और 71069229 के तहत आने वाले चांदी के बार को अब बिना इजाजत के नहीं आयात किया जा सकता है। यह प्रतिबंध, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले उत्पाद पर लागू होगा।
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सरकार ऐसे कदम उठा क्यों रही है?
दुनिया वैश्विक संकट की कगार पर खड़ी है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धराशायी हो सकती हैं। भारत के पास 690 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 10 महीने के आयात के लिए अभी पर्याप्त है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से सरकार सर्तक हो गई है। सोने-चांदी के भारी आयात से विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ रहा था।
चांदी की मांग कितनी बढ़ चुकी है?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में सोने का आयात 24 फीसदी से बढ़कर 71.98 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात 149 प्रतिशत बढ़कर 12.05 अरब डॉलर पहुंच गया। सिर्फ अप्रैल 2026 में चांदी के आयात में बहुत तेज उछाल आया। अब सरकार इस आयात पर लगाम लगाना चाहती है, जिससे भार का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे।
