सोना खरीदकर रखना निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। यही वजह है कि सोने का आयात करने में भारत काफी आगे है। बीते कुछ सालों में सोने की कीमतों में जबरदस्त इजाफा भी हुआ है। लंबे समय से सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और अब इसके चलते भारतीय लोग थोड़ा डर गए हैं। इस डर का नतीजा है कि लोग पुराना सोना जल्दी-जल्दी बेचने लगे हैं। लोगों को डर है कि कहीं सोने की कीमत इतनी कम न हो जाए कि उन्हें नुकसान हो जाए। रोचक बात है कि सोने के आयात के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की थी कि लोग सोना कम खरीदें या ना खरीदें। हाल ही में उन्होंने कहा भी था कि उनकी अपील के बाद लोगों ने सोना खरीदना कम कर दिया है। अब देखा जा रहा है कि खरीदने के बजाय लोग सोना बेच भी दे रहे हैं।
अगर सोने के मार्केट को देखें तो भारत में साल 2025-26 में कुल 6.69 लाख करोड़ के सोने का आयात किया गया था। इसमें रीसायकल्ड सोने की हिस्सेदारी सिर्फ 125 से 250 टन थी। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि जिस रफ्तार से लोग पुराना सोना बेच रहे हैं, अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2026 में रीसायकल होने वाले सोने की हिस्सेदारी 200 से 250 टन तक पहुंच सकती है।
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क्यों सोना बेचने लगे लोग?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स असोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच लगभग 50 टन सोना बेचा गया। अगर पिछले साल के अप्रैल से जून की तुलना में देखें तो यह 43 प्रतिशत ज्यादा है। इस साल सोने की कीमत 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक चली गई थी। अब सोने की कीमत 1.4 लाख तक आ गई है और आशंका जताई जा रही है कि इसमें और गिरावट होगी और 10 ग्राम सोने की कीमत 1.2 लाख तक भी आ सकती है। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की गिरती कीमत के बीच कई ग्राहक सोने के बजाय कैश को तरजीह दे रहे हैं और इस डर से सोना बेच दे रहे हैं कि उसकी कीमत और कम न हो जाए।
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा है, 'वैसे तो साल की शुरुआत में ही सोने की कीमत 1.8 लाख से 1.4 लाख पर आ गई थी लेकिन अब लोगों में डर है कि यह कीमत 1.2 लाख तक जा सकती है। यही वजह है कि लोग सोना बेचकर पैसा रखने को तरजीह दे रहे हैं।' वहीं, जिसके पास पुराना सोना है, उसे अच्छी कीमत भी मिल रही है इसलिए लोग अब सोना बेचकर पैसे निकाल रहे हैं।
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लोग घर में पड़े सोने को बेचकर पैसे निकाल रहे हैं ताकि इन पैसों का कोई इस्तेमाल हो सके और वे जोखिम से भी बच सकें। मौजूदा हालात में सोने की सप्लाई कम होने से रीसायकल्ड गोल्ड को और तरजीह दी जा रही है। कई कंपनियां ऐसी हैं जो पुराना सोना खरीदती हैं और उसे रिफाइन करके 24 कैरेट सोने में बदलती हैं। यही सोना सिक्के और गहने बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी उपलब्धता बढ़ने से आयात या नए खनन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
बता दें कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 30 हजार टन सोना पड़ा हुआ है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसमें से कुछ सोने का इस्तेमाल किया जा सके तो आयात में कमी लाई जा सकती है।


