भारत में कई बड़े एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स हैं जिनमें एडमिशन के लिए बच्चे लगातार मेहनत कर रहे हैं। आईआईटी, एम्स और भी कई संस्थानों को भारत में सबसे बेहतर माना जाता है लेकिन क्या इन संस्थानों के लिए इंटरनेशनल लेवल पर भी इसी तरह का क्रेज है या नहीं इसका जवाब रैंकिंग से मिलता है। हाल में में जारी टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) की एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में सबसे ज्यादा भारत की यूनिवर्सिटीज को जगह मिली है लेकिन टॉप यूनिवर्सिटीड में हमारी यूनिवर्सिटीज शामिल नहीं हो पाई।
इस रैंकिंग में कुल 929 यूनिवर्सिटीज शामिल हैं और इस में से 128 भारतीय हैं। पूरे एशिया में यह सबसे बड़ी संख्या है लेकिन टॉप यूनिवर्सिटीज में भारत पिछड़ गया है। टॉप 10 की लिस्ट में चीन की 5 यूनिवर्सिटी शामिल है जबकि भारत की कोई भी यूनिवर्सिटी टॉप 40 में भी जगह नहीं बना पाई है।
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रैंकिंग में चीन का दबदबा
रैंकिंग में चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी को एशिया में पहला रैंक मिला है। टॉप-10 यूनिवर्सिटीज में से 5 चीन से हैं। ये रैंकिंग बताती है कि चीन ने हायर एजुकेशन सिस्टम में जो निवेश किया है, अब उसे उसका फल मिलने लगा है। एशिया के बाकी देशों की तुलना में चीन का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। टॉप-10 में बाकी यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में इस साल मामूली बदलाव देखने को मिला है।
टॉप 10 यूनिवर्सिटी
- सिंघुआ यूनिवर्सिटी
- पेकिंग यूनिवर्सिटी
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर
- नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर
- टोक्यो यूनिवर्सिटी
- हांगकांग यूनिवर्सिटी
- फुडान यूनिवर्सिटी
- झेजियांग यूनिवर्सिटी
- शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी
- चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग
भारत की स्थिति?
इस रैंकिंग में भारत की सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटीज को भले ही शामिल किया गया हो लेकिन टॉप 100 में भारत की सिर्फ एक ही यूनिवर्सिटी शामिल है। इस लिस्ट में टॉप 40 में एक भी इंडियन इंस्टीट्यूट नहीं है। भारत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस को 43वां रैंक मिला है। इसके बाद 128वें नंबर पर सवीता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज है।
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क्यों पिछड़ रहा भारत?
भारत के संस्थान अलग-अलग रैंकिंग में लगातार पिछड़ रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। इस रैंकिंग में चीन का दबदबा रहा है। ग्लोबल रैंकिंग में चीन का लगातार ऊपर उठना रिसर्च और सराकर की ओर से हायर एजुकेशन में लगातार निवेश को दिखाता है। चीन ने इतना बेहतरीन प्रदर्शन इसलिए किया है, क्योंकि उसकी सरकार साइंस, टेक्नोलॉजी और रिसर्च यूनिवर्सिटीज में निवेश को प्राथमिकता दे रही है। चीन की यूनिवर्सिटीज में रिसर्च के लिए फंड और टीचर्स मौजूद हैं। इसके विपरीत भारत के ज्यादातर संस्थानों में स्टूडेंट टीचर रेश्यो मानक के अनुसार नहीं है। कई यूनिवर्सिटीज में पर्याप्त फंड नहीं है। सरकार की और से हायर एजुकेशन में पर्याप्त निवेश नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि भारत की यूनिवर्सिटीज सिर्फ इसी रैंकिंग में नहीं बल्कि अन्य रैंकिंग में भी पिछड़ रही हैं।
