पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को पहले ही लागू कर दिया गया है। चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। मूल रूप से चुनाव से दो दिन पहले बैन लगना था लेकिन अब चुनाव आयोग ने इसे पहले ही शुरू कर दिया है।
जिन इलाकों में गुरुवार (23 अप्रैल) को वोटिंग होनी है, वहां पहले से ही शराब की बिक्री बंद कर दी गई है। चुनाव आयोग ने कहा कि उसे शराब की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी दिखाई दी है। आयोग के बयान में कहा गया, 'अप्रैल 2026 में शराब की दुकानों द्वारा पैकेट वाली शराब उठाने में पिछले साल के मुकाबले अचानक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, संवेदनशील दुकानों की संख्या भी असामान्य रूप से बढ़ गई है।'
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चुनाव आयोग ने यह जानकारी शराब की निगरानी, बिक्री के आंकड़ों और कई अन्य स्रोतों से ली है। अप्रैल में शराब की बिक्री पिछले साल के इसी महीने से ज्यादा रही है।
टीएमसी-बीजेपी के बीच टक्कर
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी के बीच इस बार बहुत तीखी लड़ाई होने वाली है। बीजेपी राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।
सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी। आयोग ने साफ कहा कि राज्य सरकार, स्थानीय निकायों या स्वायत्त संस्थाओं का कोई भी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकेगा।
टीएमसी ने लगाया आयोग पर आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने वोटर लिस्ट की विशेष तीव्र समीक्षा को लेकर चुनाव आयोग से पहले ही टकराव किया है। पार्टी का आरोप है कि आयोग बीजेपी की मदद कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
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चुनाव घोषणा के बाद आयोग ने राज्य में कई अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की तबादले भी किए हैं। इस कदम से राज्य सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी नाराज हो गई है। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ये सभी कदम जरूरी हैं।
