साल 2026 में 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता बनी हुई है। इनमें से 3 जगहों असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है। अब तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में चुनाव होना है। इसी दिन पश्चिम बंगाल में भी पहले चरण की वोटिंग होगी। अगर उम्मीदवारों की बात करें तो तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है। यहां हर सीट पर औसतन करीब 17 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी मुकाबला काफी ज्यादा दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। वहीं, उम्मीदवारों की संख्या के मामले में पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है।

 

अगर इन 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश की सभी सीटों को जोड़ दें तो कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इन सीटों पर 8,788 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। सीटों के मामले में सबसे आगे पश्चिम बंगाल है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उम्मीदवारों की संख्या में बंगाल टॉप पर नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सिर्फ 30 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव हुए हैं।

 

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले आ गई सप्लीमेंट्री लिस्ट, यूं चेक करें अपना नाम

एक नजर में पूरा डेटा

राज्य कुल सीटें कुल उम्मीदवार  प्रति सीट उम्मीदवार
प्रतिशतउम्मीदवार बनाम सीट प्रतिशत
तमिलनाडु 234 3992 17.06 1706%
पश्चिम बंगाल 294 2920 9.93 993%
पुडुचेरी 30 291 9.7 970%
असम 126 722 5.73 573%
केरल 140 863 6.16 616%

उम्मीदवारों का सांख्यिकीय विश्लेषण

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की तुलना करें तो बड़ा अंतर दिखाई देता है। तमिलनाडु में 234 सीटों पर 3,992 उम्मीदवार खड़े हुए हैं, यानी हर एक सीट पर औसतन 17 दावेदार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यह राज्य में निर्दलीयों और छोटे दलों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में सीटें तमिलनाडु से ज्यादा हैं लेकिन उम्मीदवार कम हैं। पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं और 2,920 उम्मीदवार मैदान में हैं। बंगाल में प्रति सीट औसत 9 उम्मीदवारों का है। इससे साफ है कि बंगाल की राजनीति अभी भी गिने-चुने बड़े दलों के इर्द-गिर्द घूम रही है, जबकि तमिलनाडु में मुकाबला बहुकोणीय और काफी उलझा हुआ है।

 

यह भी पढ़ें: बंगाल, असम और बिहार में 'डेमोग्राफी' ही चुनावी फैक्टर? हिमंता का डर समझिए

छोटे राज्यों में दिलचस्प है उम्मीदवारों का गणित

9 अप्रैल को जिन 2 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में वोटिंग हुई वहां का आंकड़ा काफी दिलचस्प रहा। पुडुचेरी में सीटें तो कम हैं लेकिन उम्मीदवारों की टक्कर किसी बड़े राज्य से कम नहीं दिखी। यहां 30 सीटों पर कुल 291 उम्मीदवार मैदान में थे यानी हर सीट पर औसतन 9 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे थे।

 

वहीं केरल और असम की तस्वीर थोड़ी अलग रही। केरल में 140 सीटों पर 863 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे, यानी एक सीट पर करीब 6 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। दूसरी तरफ असम में सबसे कम उम्मीदवार मैदान में दिखे। यहां 126 सीटों पर सिर्फ 722 उम्मीदवार चुनाव लड़े, यानी हर सीट पर औसतन 5 उम्मीदवार ही थे।

 

यह भी पढ़ें: PM मोदी के लिए खुद मछली क्यों पकाना चाहती हैं CM ममता बनर्जी?

 

कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि असम और केरल में मुकाबला थोड़ा सीधा रहा, जहां वोटर्स के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे और उन्हें सीमित उम्मीदवारों में से ही अपना नेता चुनना पड़ा।