पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों राजनीतिक दलों के लिए आरपार की लड़ाई बन गई है। दोनों दलों ने अपने सारे दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतार दिया है। टीएमसी और बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की है, जिसमें कई बड़े नेताओं को मौका दिया गया है। नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर तक मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
भारतीय जनता पार्टी जहां सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, रेखा पात्रा, रूपा गांगुली, निशीथ प्रमाणिक, दिव्येंदु अधिकारी और हिरण चटर्जी जैसे नेताओं की बदौलत जमीनी लड़ाई लड़ने का प्लान तैयार कर रही है, तृणमूल कांग्रेस ने भी ऐसा ही प्लान तैयार किया है। चुनावी जंग की कमान, खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संभाल चुकी हैं। वह एक बार फिर पदयात्रा पर निकल रहीं हैं।
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TMC, किन नेताओं के सहारे BJP को रोक रही है?
- ममता बनर्जी: नंदीग्राम हारने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर का रुख किया। इसी विधानसभा सीट से सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को चुनौती दे रहे हैं। सुवेंदु से ममता बनर्जी एक बार हार का स्वाद चख चुकी हैं। बीजेपी दोबारा हराने की पूरी कोशिश कर रही है। बीजेपी उन्हें नंदीग्राम वाली दुविधा में डाल रही है, लेकिन इस बार ममता बनर्जी की भी तैयारियां कम नहीं हैं। वह पहले ही पदयात्रा पर निकल चुकी हैं। बीजेपी की तरफ से भी रणनीति साफ दिख रही है। पार्टी ने सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों, भवानीपुर और नंदीग्राम से उतार दिया है।
- चंद्रिमा भट्टाचार्य: ममता बनर्जी की करीबी हैं। पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री हैं। उनकी लोक कल्याणकारी योजनाएं राज्य में चर्चित रही हैं। उन्होंने एलान किया था कि बंगाल सरकार बेरोजगार युवाओं को 5 साल तक 1,500 रुपये का मासिक भत्ता देगी। वह लोकप्रिय हैं। वह दमदम विधानसभा से चुनावी मैदान में उतर रहीं हैं। उनके खिलाफ बीजेपी ने अरिजीत बक्शी को उतारा है।
- बिप्लब मित्रा: तृणमूल कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में शुमार हैं। ममता बनर्जी के करीबी हैं। वह हरिरामपुर सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। बीजेपी भी इन्हें हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। साल 2011 से वह इस सीट से कभी चुनाव हारे नहीं हैं। उत्तर बंगाल में बीजेपी की बढ़ती ताकत से अब इन्हें दो-दो हाथ करना है। बीजेपी ने इस सीट पर चर्चित चेहरे देबब्रत मजूमदार को उतारा है। वह देबब्रत का विजय रथ एक बार फिर रोक सकते हैं।
- पबित्र कर: सुवेंदु अधिकारी की विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस ने उनके सहयोगी रहे पबित्र कर को उतार दिया है। बीजेपी के लिए यह दोहरी मुश्किल है। सुवेंदु को अपने ही सहयोगी के खिलाफ अब जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है। पबित्र कर वही हैं, जिनकी बदौलत सुवेंदु ने ममता बनर्जी को उन्हीं की विधानसभा में 1 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया था। पबित्र पहले नंदीग्राम-2 ब्लॉक के पंचायत प्रधान रह चुके हैं। टीएमसी को उम्मीद है कि वे सुवेंदु का किला ढहा देंगे।
- अरूप बिस्वास: टॉलीगंज, टीएमसी का गढ़ है। अरूप बिस्वार, पार्टी के चर्चित नेता हैं, राज्य के ऊर्जा मंत्री हैं, संगठन पर मजबूत पकड़ है। वह मजबूत स्थानीय पकड़ के लिए जाने जाते हैं। बीजेपी ने यहां से पापिया (डे) अधिकारी को उतारा है। यह कोलकाता का पॉश इलाका है। शहरी इलाकों में बीजेपी मजबूती से चुनाव लड़ रही है।
- अरूप रॉय: हावड़ा सेंट्रल पर टीएमसी बेहद मजबूत स्थिति में है। वजह अरूप रॉय हैं। उनके पास सहकारिता विभाग रहा है। यह इलाका, औद्योगिक वजहों से चर्चा में रहता है। बीजेपी ने इनके खिलाफ अपने प्रत्याशी का नाम अभी एलान नहीं किया है। पूरे हावड़ा जोन में ही बीजेपी पूरे दमखम से उतरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह, कैंपेन संभाल रहे हैं। ऐसे में यह लड़ाई भी दिलचस्प होने वाली है।
- फिरहाद हकीम: कोलकाता पोर्ट से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। सियासी जमीन इतनी मजबूत है कि इन्हें हराना मुश्किल है। अल्पसंख्यक एंगल और स्थति मजबूत करता है। उनकी सीट, टीएमसी की गढ़ है। बीजेपी शहरों में बढ़िया लड़ाई लड़ रही है। बीजेपी ने अभी इस सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
- कुणाल घोष: ममता बनर्जी के करीबी नेता हैं। बेलेघाटा से चुनावी मैदान में हैं। यह सीट पहले सीपीएम की मजबूत जगह थी। कुणाल मीडिया में खासे चर्चित हैं। बीजेपी ने यहां से पार्थ चौधरी को उतार दिया है। यह लड़ाई, टीएमसी के लिए बहुत आसान नहीं रहने वाली है।
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पश्चिम बंगाल में वोटिंग कब है?
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान है। चुनाव के नतीजे नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।
