पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल इशारा कर रहे हैं कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विदाई हो सकती है। साल 2011 से ही पश्चिम बंगाल की सत्ता में काबिज ममता बनर्जी, 4 मई के बाद सत्ता गंवा सकती हैं। ज्यादातर एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जीतते हुए दिखाया गया है।
पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटें हैं, जिनमें बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। 6 एग्जिट पोल एजेंसियों में से चार ने दावा किया है कि BJP राज्य में सरकार बनाने जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो अगला सवाल यह होगा कि राज्य में ममता बनर्जी के कद का दूसरा ऐसा नेता कौन है, जिस पर भरोसा जताएगी।
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कौन से चेहरे सीएम पद के दावेदार हैं?
राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पास कई चेहरे हैं। दिलीप घोष, पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बढ़त दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही है। 2021 के चुनाव में बीजेपी को 70 से ज्यादा सीटें दिलाने में उनकी भी अहम भूमिका मानी जाती रही है। वह भी सीएम पद के प्रबल दावेदार हैं।
अगर ममता बनर्जी के सामने महिला चेहरे को तैयार करना हो तो लॉकेट चटर्जी और रूपा गांगुली पर भी बीजेपी भरोसा कर सकती है। दिलीप घोष के अलावा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य का नाम भी चर्चा में है। मगर इन सबसे ज्यादा अहम दावेदारी, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की है।
सुवेंदु का शोर ज्यादा क्यों है?
सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी को उनकी विधानसभा सीट नंदीग्राम में ही साल 2021 के विधानसभा चुनाव में हार का स्वाद चखा चुके हैं। इस बार भी उन्होंने भवनीपुर सीट से ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दी है। वह नंदीग्राम से भी लड़ रहे हैं और भवानीपुर से भी। नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने उनके खिलाफ, उन्हीं के भरोसेमंद रहे पबित्र कर को उतारा है।
बीजेपी ने सांकेतिक तौर पर उन्हें साल 2021 में ही ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। भले ही सीएम उम्मीदवार का नाम बीजेपी ने नहीं घोषित किया है लेकिन सुवेंदु अधिकारी के सीएम बनने की प्रबल संभावना है।
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क्यों लगाई जा रही है बीजेपी के सरकार बनाने की अटकलें?
ज्यादातर एग्जिट पोल में यह इशारा किया गया है कि बीजेपी सरकार बना रही है। प्रजा पोल के मुताबिक BJP 178 से 208 सीटें जीत सकती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सिर्फ 85 से 110 सीटों तक सिमट सकती है।
पी-मार्क, मैट्रिज और पोल डायरी ने भी BJP को 142 से 175 सीटों के बीच बताते हुए बहुमत का अनुमान लगाया है। इन एजेंसियों के अनुसार TMC को 99 से 140 सीटें मिल सकती हैं।
सुवेंदु अधिकारी क्यों हो सकते हैं CM पद के दावेदार?
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी, वह नेता हैं, जिन्होंने 2011 से अजेय रही ममता बनर्जी को उनके गढ़ में हराया है। राज्य में सुवेंदु अधिकारी की छवी कट्टर हिंदुत्ववादी नेता की लगातार बनती जा रही है। साल 2020 तक, वह TMC के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेता रहे, बागी हुए तो बीजेपी ने 2021 का चुनाव ही उनके सिर पर खेल लिया।
ममता बनर्जी की तुलना में अगर बंगाल के किसी स्थानीय बीजेपी नेता की लोकप्रियता देखें तो कमतर पड़े, सुवेंदु अधिकारी अपवाद हैं। हिंदू बाहुल इलाकों में महज 5 साल के भीतर उनकी छवि ठीक वैसी ही बन गई है, जैसे असम में हिमंत बिस्व सरमा की बनी है। वह हिंदुत्व के नए पोस्टर बॉय बन गए हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी बाहर से आए उन नेताओं को ज्यादा मौके देती है, जिनके पास व्यापकर जानाधार होता है।
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अब बाहरियों से बीजेपी को परहेज नहीं
भारतीय जनता पार्टी ने 2014 से ही अपने संगठन में सुधार पर जोर दिया है। बीजेपी, पहले जिन बाहरी दलों के नेताओं को हाशिए पर रखती थी, अब बड़े मौके देती है। बाहर और गैर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं को भी मौके मिले हैं। कई राज्यों में बड़े चेहरे ऐसे हैं, जो कांग्रेस या दूसरे दलों से आए हैं।
बीजेपी, बाहर से आए चेहरों को मु्ख्यमंत्री तक बनाने से परहेज नहीं करती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, कभी कट्टर कांग्रेसी थे और पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जैसे चेहरों की जमकर आलोचना करते थे। अब वह बीजेपी के प्रमुख चेहरे हैं, असम के मुख्यमंत्री हैं और उनकी गिनती, योगी आदित्यनाथ सरीखे नेताओं के साथ होती है। वह बीजेपी के स्टार प्रचारक भी हैं। झारखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक, उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं।
विपक्ष के आलोचक, हो जाते हैं अपने, हिमंता से मणिक साहा तक
सिर्फ हिमंता ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी कांग्रेस से आए हैं। साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की राह अपनाई थी। एन बीरेन सिंह भी पुराने कांग्रेसी रहे हैं लेकिन उन्हें बीजेपी ने मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाया था। मणिक साहा, खुद कांग्रेसी नेता थे लेकिन अब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी इन नेताओं को बड़े मौके इसलिए देती है कि ये कई समर्थकों के साथ पार्टी में शमिल होते हैं, व्यापाक जनाधार होता है और अहम जिम्मेदारी न देने पर पुरानी पार्टी में लौटने का डर भी होता है।
सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि अब वह ममता बनर्जी के सीधे प्रतिद्वंद्वी हैं, जिन्हें हराने में तृणमूल कांग्रेस की पूरी मशीनरी लगी है। नंदीग्राम की एक जीत ने उनके कद को इतना बढ़ा दिया है कि खुद ममता बनर्जी, उन्हें लेकर असहज हैं।
सुवेंदु अधिकारी के पास पास न केवल तृणमूल कांग्रेस की संगठन स्तर पर मजबूतियों की जानकारी है, वह कमजोरियों को बाखूबी समझते हैं। अब बंगाल में हिंदू ध्रुवीकरण और राज्य के संगठन पर मजबूत पकड़, उन्हें बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बना रही है। अगर राज्य में बीजेपी की सरकार आई तो उन्हें ज्यादा बड़ा मौका मिल सकता है।
