पूर्व बर्धमान पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में से एक है। पूर्व बर्धमान का जिला मुख्यालय बर्धमान शहर में है। इस जिले को साल 2017 में पुराने बर्धमान जिला को दो भागों में बांट दिया गया था, जिसके बाद एक नए जिले पश्चिम बर्धमान का जन्म हुआ। यह जिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कृषि की दृष्टि से बहुत समृद्ध जिला है। पूर्व बर्धमान 6 जिलों की सीमाओं को टच करता है, जिसमें हुगली, बांकुरा, पश्चिम बर्धमान, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और नदिया शामिल हैं।

 

यह पूरा क्षेत्र पहले 'रार्ह क्षेत्र' का हिस्सा था, जो मध्यकाल में मुगल साम्राज्य के अधीन रहा। मगर, मुगलों के कमजोर होने के बाद यह ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया। बंगाल में एक आम राय के मुताबिक, बर्दवान का मतलब है खुशहाली वाला विकास केंद्र है, जो ऊपरी गंगा घाटी से आर्यनीकरण के विकास में खुशहाली के एक निशान के रूप में बर्दवान कहा जाता था।

 

पूर्व बर्धमान को पश्चिम बंगाल का धान का कटोरा कहा जाता है। धान यहां की सबसे मुख्य फसल है। इसके अलावा बर्धमान में आलू और गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और नहर सिंचाई प्रणाली कृषि को मजबूत बनाती है। कृषि प्रधान इस जिले की अर्थव्यवस्था की मुख्य स्रोत फसलों के अलावा अब छोटे उद्यम भी हैं।

 

यह भी पढ़ें: पश्चिम मेदिनीपुर: 15 में 13 TMC, ममता के गढ़ में बीजेपी कितनी मजबूत है?

बर्धमान का पुराना इतिहास

बर्धमान पुराने बंगाल का एक जाना-माना हिस्सा हमेशा से बना रहा है। 6वीं सदी के मिले शिलालेखों के सबूत बताते हैं कि बर्धमान एक मशहूर भुक्ति था और उस जमाने में उसका जिक्र राधादेश या राधा के तौर पर भी किया गया था। राधा-बर्धमान इलाका मौर्य साम्राज्य का हिस्सा बन गया। हालांकि, तीसरी सदी के आखिर में पश्चिम बंगाल में वर्मन वंश सत्ता में आया। चंद्र वर्मन को बर्धमान का राजा माना जा सकता है। उसके बाद गुप्त वंश सत्ता में आया और विनय गुप्ता इस इलाके के राजा बने। बाद में बंगाल के पहले आजाद सबसे बड़े राजा शशांक और फिर जयनाग इस इलाके के शासक बने।

 

बाद में दशकों में मुस्लिम हमले शुरू होने से पहले बर्धमान जिले में गोपभूम के सद्गोप वंश ने थोड़े समय तक राज किया। बंगाल पर पहला मुस्लिम हमला लक्ष्मणसेन के राज में बख्तियार खिलजी ने किया था। दस साल बाद, हसमुद्दीन इवाज के राज में उत्तरी बर्धमान के एक हिस्से पर लखनौती या गौधा के मुस्लिम शासक ने काब्जा कर लिया। तब इस इलाके पर कब्जा करने के लिए मुस्लिम शासक और उड़ीसा के राजाओं के बीच लड़ाई हुई।

तहसील और ब्लॉक

पूर्व बर्धमान जिले में चार सब-डिवीजन हैं। यह डिवीजन बर्धमान सदर (उत्तर), बर्धमान सदर (दक्षिण), कटवा, कालना हैं। वहीं, जिले में 8 ब्लॉक हैं। इनमें ऑसग्राम-I, ऑसग्राम-II, गलसी-I, गलसी-II, खंडघोष, बर्दवान-I, बर्दवान-II, भतार, रैना-I, रैना-II, जमालपुर, मेमारी-I, मेमारी-II, मोंटेश्वर, मोंगलकोट, केतुग्राम-I, केतुग्राम-II, कटवा-I, कटवा-II, पुर्बस्थली-I, पुर्बस्थली-II, कालना-I, कालना-II शामिल हैं। 

विधानसभा सीटें

पूर्व बर्धमान जिले में कुल 15 विधानसभा सीटे हैं। ये विधानसभा सीटें खंडघोष (एससी), बर्धमान दक्षिण, रैना (एससी), जमालपुर (एससी), मोंटेश्वर, कालना (एससी), मेमारी, बर्धमान उत्तर (एससी), भतार, पुरबस्थली दक्षिण, पुरबस्थली उत्तर, कटवा, केतुग्राम, मोंगलकोट, औसग्राम (एससी), गलसी (एससी) हैं। यह सभी विधानसभा सीटें पूर्व बर्धमान लोकसभा में आती हैं। 

 

पिछले 2021 के चुनाव में यहां से एक तरफा टीएमसी ने बाजी मारी थी। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी जिले की सभी 15 विधानसीटें जीत गई थी। हालांकि, बीजेपी सभी सीटों प र नंबर दो पर रही थी।

 

यह भी पढ़ें: चुनाव से पहले 91 लाख वोटरों के नाम कटे, क्या सिर्फ CM ममता को ही होगा नुकसान?

 

पूर्व बर्धमान में मुख्य रूप से हिंदू और मुस्लिम आबादी रहती हैं। यहां 73.75 फीसदी हिंदू और 25.14 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा यहां अन्य धर्मों के लोग रहते हैं। यहां के ज्यादातर लोग बंगाली भाषा बोलते हैं। संथाली और हिंदी में भी लोग बातचीत करते हैं।

धार्मिक स्थल

पूर्व बर्धमान में सर्वमंगला मंदिर, राजबाड़ी परिसर कलना, टेराकोटा मंदिर हैं। यहां दुर्गा पूजा यहां बहुत धूमधाम से मनाई जाती है।

सामाजिक ताना बाना

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक पूर्व बर्धमान की कुल जनसंख्या 4,835,532 है। इनमें 51.07 फीसदी पुरुष और 48.93 फीसदी महिलाएं हैं। यहां 1000 पुरुषों में 890 महिलाएं हैं।

पूर्व बर्धमान में कौन मजबूत?

2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 15 में से सभी विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। टीएमसी ने ये सीटें भारी वोटों के मार्जिन से जीती थीं। बंगाल में टीएमसी जिन जिलों में मजबूत स्थिती में है, उन जिलों में से पूर्व बर्धमान भी है। बीजेपी के लिए यहां टीएमसी को हराया टेढी खीर साबित हो सकता है। इसके अलावा टीएमसी 2014 से लेकर अबतक लगातार लोकसभा चुनाव जीतती आ रही है। इस लिहाज से इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ताधानी दल की सीटें में सेंधमारी करने की कोशिश करेगा।

जिले की स्थिति

क्षेत्रफल- 5432.69 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर- 75.48%
विधानसभा सीटें- 15
उप-मंडल- 04
नगर पालिका- 3
नगर निगम- 1
ब्लॉक- 23
ग्राम पंचायत- 215