केरल के चुनाव को अगर ध्यान से देखें तो आपको कांग्रेस नाम वाले कई राजनीतिक दल दिखेंगे। ऐसे ही कई दलों के नाम केरल कांग्रेस भी है। राहुल गांधी वाले इंडियन नेशनल कांग्रेस के अलावा कांग्रेस (सेक्युलर), केरल कांग्रेस (M), केरल कांग्रेस (B) और केरल कांग्रेस (जैकब) जैसे तमाम दलों के नाम एक ही जैसे हैं। ये दल अलग-अलग गठबंधनों, अलग क्षेत्रों और अलग विचारधारा के हिसाब से काम करेंगे। इस साल के चुनाव में केरल कांग्रेस नाम के कई दल सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट (LDF) का भी हिस्सा हैं और कई दल विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) का भी हिस्सा हैं।
समय-समय पर ये दल गठबंधन बदलते रहते हैं और उसी के हिसाब से सीटें भी लेते रहते हैं। हम फिलहाल के लिए केरल कांग्रेस की बात कर रहे हैं। केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़े हर चुनाव में कुछ सीटें भी जीतते हैं और अपने प्रभाव के चलते इन्हें बड़े राजनीतिक दलों से भाव भी खूब मिलता है। पिछले 6 दशकों में ये अभी भी अपने अस्तित्व को बनाए हुए हैं। आइए इन्हीं के बारे में विस्तार से समझते हैं।
क्या है केरल कांग्रेस की कहानी?
साल 1964 में बनी यह पार्टी अब 62 साल की हो चुकी है लेकिन कई धड़ों में बंटी है। इसके समर्थकों का कहना है कि जितने धड़ों में यह बंटती है, उतनी ही मजबूत होती है। शुरुआत में यह पार्टी केरल के रबर किसानों की आवाज को उठाने के लिए बनाई गई थी। पी टी चाको कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे। एक स्कैंडल में उनका नाम चर्चा में आया। कहा जाता है कि कांग्रेस में ही उनके विरोधियों ने पी टी चाको को फंसाया और मजबूरन उन्हें केरल के गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसी के बाद उनके करीबियों ने कांग्रेस छोड़ दी और नई पार्टी केरल कांग्रेस का गठन किया।
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केरल कांग्रेस बनाने वालों में के एम जॉर्ज और आर बालाकृष्णन पिल्लई जैसे नेता शामिल थे। नायर सर्विस सोसायटी (NSS) ने भी इसका समर्थन किया। इस नई पार्टी के मुखिया के एम जॉर्ज बने थे। पार्टी के गठन के अगले ही साल यानी 1965 में जब चुनाव बने तो केरल कांग्रेस ने 26 सीटों पर चुनाव जीत लिया। हालांकि, इमरजेंसी के दौर में केरल कांग्रेस के नेताओं को भी आड़े हाथ लिया गया। के एम जॉर्ज और बालाकृष्णन पिल्लई दोनों ही जेल भेज दिए गए। बाद में दबाव बना तो केरल कांग्रेस तत्कालीन केरल सरकार (सी अच्युत मेनन) की सरकार में शामिल हो गई।
हालांकि, तुरंत ही मामला बिगड़ने भी लगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल के एम मणि ने कहा कि एक ही व्यक्ति पार्टी का चेयरमन और मंत्री नहीं बनेगा। वजह यह थी उस समय केरल कांग्रेस के मुखिया के एम जॉर्ज केरल सरकार में मंत्री बन गए थे। बालाकृष्णन पिल्लई भी मंत्री बने थे। ऐसे में टकराव बढ़ने लगा। उसी समय बालाकृष्णन ने इस्तीफा दे दिया। कुछ वक्त बात ही के एम जॉर्ज का निधन हो गया और बालाकृष्णन पिल्लई ने आरोप लगाए कि के एम मणि की बातों से दुखी होने के चलते जॉर्ज का निधन हुआ है।
कैसे बदलती गई किस्मत?
फिर साल 1977 आया और केरल में कांग्रेस के नेता के करुणाकरन की अगुवाई वाली सरकार बनी। के एम मणि को करुणाकरन ने राज्य का गृहमंत्री और केरल कांग्रेस का मुखिया बना दिया। मामला तब पलटा जब करुणाकरन की जगह ए के एंटनी सीएम बन गए। तब तक मामला कोर्ट में था और इस केस में हार के बाद के एम मणि को अपना पद छोड़ना पड़ा। पीजे जोसेफ उनकी जगह मंत्री बने लेकिन के एम मणि अगले ही साल फिर से केस जीत गए और जोसेफ को अपना पद छोड़ना पड़ा। जोसेफ ने पार्टी मुखिया का पद कब्जा लिया और यहां से पहले बिखराव की बात शुरू हुई।
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साल 1979 में के एम मणि ने केरल कांग्रेस (मणि) यानी केरल कांग्रेस (एम) की स्थापना की। साल 1979 में ही पीजे जोसेफ ने केरल कांग्रेस (जोसेफ) बना ली। तब टी एम जैकब भी उनके साथ आ गए थे। साल 1989 में बालाकृष्णन पिल्लई के मतभेद हुए उन्होंने केरल कांग्रेस (जे) से अलग होकर केरल कांग्रेस (बी) बना ली। तब पी सी जॉर्ज भी इसमें शामिल हो गए।
साल 1993 में एक और विभाजन हुआ और केरल कांग्रेस (जैकब) की स्थापना हुई। आगे चलकर पीसी जॉर्ज ने केरल कांग्रेस (सेक्युलर) बनाई थी लेकिन बाद में अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर दिया।
अब क्या है स्थिति?
लंबे समय तक कांग्रेस के साथ चली केरल कांग्रेस (मणि) यानी केरल कांग्रेस (M) अब LDF का हिस्सा है। संख्या के हिसाब से देखें तो सबसे मजबूत धड़ा यही है और लेफ्ट गठबंधन ने इसे 12 सीटें दी हैं। लेफ्ट के ही साथ चल रहे दूसरे धड़े का नाम केरल कांग्रेस (B) है। यहां बी का अर्थ बालाकृष्णन पिल्लई से है।
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केरल कांग्रेस (जैकब) भी एक अहम दल है। पहले यह पार्टी लेफ्ट के साथ थी लेकिन अब यह UDF के साथ है। UDF में इसे एक सीट मिली है। इसी तरह जनाधिपत्य केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस (सकारिया थॉमस) भी हैं। केरल कांग्रेस (सेक्युलर) पी सी जॉर्ज की पार्टी हुआ करती थी लेकिन जनवरी 2024 में जॉर्ज ने अपनी इस पार्टी का विलय बीजेपी में कर दिया और खुद भी बीजेपी में शामिल हो गए।
