तमिलनाडु में AIADMK के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारा फाइनल हो गया है। काफी समय से मीडिया के जरिए गठबंधन में नाराजगी की बाहर आ रही खबरों के बीच आखिरकार बात बन गई। 234 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी 'बड़े भाई' AIADMK से 40 सीटें मांग रही थी लेकिन बंटवारे में उसे महज 27 सीटें ही मिली हैं, जबकि AIADMK खुद 169 सीटों पर लड़ेगी। इसके अलावा इ गठबंधन में PMK, AMMK, TMC, UK, TMMK आदि दलों को सीट शेयरिंग में हिस्सा दिया गया है। PMK को गठबंधन में कुल 18 सीटें मिली हैं। PMK को मिली सीटें लगभग बीजेपी के बराबर हैं।

 

ऐसे में सवाल उठता है कि सवाल उठता है कि आखिर तमिलनाडु के छोटे दलों के बराबर ही बीजेपी को क्यों सीटें मिली हैं। इस सवाल का जवाब छोटे-बड़े दलों की चर्चा के बीच नहीं बल्कि ये छोटी पार्टियां तमिलनाडु की राजनीति में काफी समय से सक्रिय हैं। इनमें से कई दल विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 

 

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पट्टाली मक्कल काची

दरअसल, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के 1990 के दशक से ही तमिलनाडु में चुनाव लड़ती आ रही है। इसी समय से पीएमके और AIADMK ने तमिलनाडु में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ रही हैं। कई चुनावों में दोनों को साझी सफलता मिली है। इस बार फिर से दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और राज्य में सफलता की आस लगाए बैठे हैं।

छोटे दलों का खेल

अंबुमणि रामदास पीएमके के प्रमुख हैं। अंबुमणि तमिलनाडु में एनडीए का हिस्सा हैं।  AIADMK और बीजेपी के साथ समझौते में राज्यसभा गए हैं। राज्य में सीट बंटवारा AIADMK के मन मुताबिक हुआ है। इसमें पीएमके के हिस्से में 18 सीटों आई हैं। इसमें सलेमपुर (पूर्व), धर्मापुरी, पेन्नाग्रम, विक्रिरावंडी आदि सीटें शामिल हैं। वहीं, बीजेपी को जो 27 सीटें मिली हैं, उसमें मायलापोर, थल्ली, मोडाकुरुची, अविनाशी, कोयंबटूर (उत्तर) आदि हैं।

 

अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) को 11 सीटें मिली हैं। इनमें पेरियाकुमल, मन्नारकुडी, नानगुरुई आदि हैं। तमिल मनीला कांग्रेस (TMC) को 5 सीटें मिली हैं। इसमें इरोड (पूर्व), रानीपेट, कल्लीयूर, कुम्भाकुनम और ओत्तनचत्रम हैं। इंडिया जननायक काटची (UK) के हिस्से में पुल्लवपुरम और कुन्नम विधानसभा सीटें आई हैं। इसके अलावा TMMK और पुरैची भारतम को एक-एक सीट मिली है।

 

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तमिलनाडु में छोटे दलों की अहमियत

दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति में छोटे दलों की हमेशा से अहमियत रही है। इसको ऐसे समझिए कि मुख्यमंभी एमके स्टालिन भी चुनाव में छोटी-छोटी पार्टियों पर फोकस कर रहे हैं। वह सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में अब 20 से ज्यादा सहयोगियों को शामिल करके चुनाव लड़ रहे हैं। एनडीए की ही तरह उन्होंने भी छोटे दलों को सीटें दी हैं। 2021 में यह डीएमके के गठबंधन में 13 दल शामिल थे, लेकिन इस बार यह संख्या 20 से ज्यादा है। ये पार्टियां किसी जिले या दो जिलों में खास समुदाय के बीच असर रखती हैं।

हर इलाके के हिसाब से पार्टी

इसको ऐसे समझा जा सकता है कि पश्चिमी तमिलनाडु के गौंडर इलाके में कोंगुनाडु मक्कल देसिया कटची प्रभावशाली पार्टी है। इसकी वजह से 2024 लोकसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन ने वहां सभी सीटें जीतीं। केएमडीके इस बार डीएमके के निशान पर दो सीटें लड़ेगी।

 

इसी तरह से यह दल मुस्लिम इलाकों, दलित जाति, शहरी वोट, किसानों आदि पर प्रभाव रखती हैं। यही वजह है कि तमिलनाडु में एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में AIADMK ने गठबंधन में शामिल दलों को बेहतर सीटें ऑफर की हैं।