पश्चिम बंगाल में कुछ ही दिन बाद विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। इन चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं और जमकर प्रचार कर रहे हैं। मुख्य लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल चुनाव की निर्णायक वैचारिक लड़ाई का बिगुल फूंकते हुए शुक्रवार को अपना घोषणापत्र जारी किया। इसमें पार्टी ने एक अहम वादा किया है कि राज्य में सत्ता में आने के छह महीने के भीतर पार्टी समान नागरिक संहिता (यूसीसी)लागू करेगी। इसके अलावा कई अन्य वादे भी पार्टी ने बंगाल की जनता से किए हैं और इन वादों से एक बार फिर हिंदू बनाम मुस्लिम वोटों पर घमासान छिड़ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी को इस वादे से हिंदू मतों को एकजुट करने में मदद मिल सकती है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर से अपने मजबूत आधार अल्पसंख्यक मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश कर सकती है। अमित शाह ने पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए टीएमसी पार्टी पर जमकर हमला बोला।
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अमित शाह ने बताया प्लान
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोलकाता में बीजेपी के संकल्प पत्र को जारी करते हुए कहा कि बंगाल में धर्म से परे प्रत्येक नागरिक के लिए एक ही कानून होगा। उन्होंने कहा, 'बीजेपी शासित कई राज्यों ने समान नागरिक संहिता लागू कर दी है। छह महीने के भीतर, हम बंगाल में भी इसे लागू करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो।'
बीजेपी के घोषणापत्र में यूसीसी के वादे के साथ-साथ घुसपैठ और मवेशी तस्करी को रोकने का भी संकल्प लिया गया है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने इसी के साथ सीमा सुरक्षा और तुष्टीकरण की राजनीति पर आधारित चुनावी चर्चा को बल मिलेगा। यूसीसी सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने को लेकर एक समान कानून है। आरएसएस और बीजेपी लंबे समय से इन मुद्दों पर मुखर रहते हैं।
वोटिंग से ठीक पहले उठाया मुद्दा
बीजेपी ने 23 अप्रैल को मतदान होने से ठीक दो हफ्ते पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। यूसीसी का मुद्दा ऐसे समय उठाना राज्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हैं और 294 सदस्यीय विधानसभा सीट में से 110 पर अल्पसंख्यक आबादी निर्णायक भूमिका में है। अमित शाह ने कहा, 'मुझे एक बात बताइए। संविधान इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। क्या सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना तुष्टीकरण है? या फिर तुष्टीकरण तब है जब एक नागरिक को चार विवाह करने की अनुमति है और दूसरे को केवल एक? यूसीसी तुष्टीकरण को समाप्त करता है।'
आलोचनाओं का दिया जवाब
यूसीसी के मुद्दे पर पर बीजेपी की आलोचना हो रही है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा, 'समान नागरिक संहिता की सिफारिश बीजेपी की नहीं बल्कि संविधान सभा की थी। तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ही यूसीसी इतने लंबे समय तक लागू नहीं हो पाई।' टीएमसी ने अमित शाह के बयानों को सांप्रदायिक बताया और चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।
टीएमसी ने लगाए आरोप
तृणमूल के सीनियर नेताओं ने यूसीसी की घोषणा को मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया। उन्होंने बीजेपी पर अल्पसंख्यकों के बीच भय फैलाकर हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूर्व में यूसीसी की आलोचना कर चुकी हैं। उन्होंने इसे सुधार के नाम पर बहुसंख्यकवादी एजेंडा थोपने का प्रयास करार दिया था। हालांकि, टीएमसी नेताओं का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा बीजेपी के लिए हानिकारक और टीएमसी के लिए मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि इससे मुस्लिम वोटों के कुछ वर्गों में हाल तक दिख रहा बिखराव रुक सकता है।
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मुस्लिम वोट टीएमसी के लिए एकजुट
इसके अलावा दो महीनों से मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी को चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। इंडियन सेकुलर फ्रंट, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) और तृणमूल से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी जैसे छोटे संगठन खुद को एक स्वतंत्र मुस्लिम आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, पार्टी के सामने अब यह चुनौती भी नहीं रही क्योंकि चुनाव से पहले एक वीडियो सामने आने से गठबंधन टूट गया है। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर 24 परगना जैसे हिस्सों में पार्टी को अब लाभ मिल सकता है।
