पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों मुस्लिम मतदाताओं को लेकर हलचल काफी तेज है। तमाम विपक्षी दल मुस्लिम मतदाताओं को विश्वास जीतने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद जिले की राजनीति और भी ज्यादा रोचक हो गई है। 2021 के विधानसभा चुनाव में एक घटना से ममता बनर्जी को इस जिले में मुस्लिमों का एकजुट समर्थन मिल गया था लेकिन इस बार ममता परेशान हैं। परेशानी की वजह उनके पुराने साथी और बागी नेता हुमायूं कबीर के साथ-साथ कांग्रेस में उनके कट्टर विरोधी अधीर रंजन चौधरी हैं। दोनों ममता बनर्जी के कोर वोट बैंक पर नजर टिकाए बैठे हैं और उधर बीजेपी मुस्लिम बहुल इस जिले में अपने समीकरण बैठा रही है।
2021 के विधानसभा चुनाव में इस जिले में कांग्रेस और लेफ्ट का पत्ता साफ हो गया था। ममता बनर्जी को जिले की 22 में से 20 सीटों पर जीत मिली थी और 2 सीटों पर बीजेपी ने भी अपना खाता खोला था। बीजेपी को कांग्रेस और टीएमसी के बीच की लड़ाई का फायदा मिला था। बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में इस जिले में ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन ने जीत दर्ज की थी लेकिन पांच साल में समीकरण पूरी तरह से बदल गए थे। इसके पीछे एक बड़ी वजह सीतलकुची की घटना भी थी।
सीतलकुची की घटना से ममता को फायदा
2021 के विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल में एक ऐसी घटना हुई जिससे राजनीति में भूंचाल आ गया।10 अप्रैल 2021 को कूचबिहार जिले की सीतलकुची विधानसभा क्षे में बूथ नंबर 126 पर चौथे चरण के मतदान के दौरान फायरिंग की दो घटनाएं सामने आई थी। इस घटनाक्रम में कुल पांच लोगों की मौत हो गई थी। फायरिंग की घटनाओं में से एक जगह पहली बार वोट देने जा रहे एक वोटर को गोली लगी थी जबकि बाकी 4 लोगों की मौत CISF की गोली से हुई थी। एसपी देवाशीष की रिपोर्ट में इसे सेंट्रल फोर्सेज की ओर से आत्मरक्षा में की गई फायरिंग बताया गया था जबकि ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि सेंट्रल फोर्स ने केंद्र के इशारे पर गोली मारकर हत्या की है।
इस घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने कुछ विवादित बयान भी दिए जिससे अल्पसंख्य समुदाय एकजुट होकर ममता बनर्जी के साथ खड़ा हो गया। कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक ने TMC की तरफ रुख किया। इस घटना का सीधा असर नतीजों पर दिखा और ममता बनर्जी की पार्टी को जहां 2016 में सिर्फ 4 सीट मिली थी वहीं उन्हें 20 सीटें मिल गईं।
कांग्रेस-अधीर करेंगे वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी टीएमसी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस के लिए बंगाल में यह एक बड़ा झटका था। हालांकि, अब स्थिति बदली हुई नजर आ रही है। कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर सीट से उम्मीदवार बना दिया है। अधीर बहरामपुर के स्थानीय लोगों में काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं और लंबे समय से इस इलाके का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
अब अधीर रंजन चौधरी जब विधानसभा के चुनाव में उतर चुके हैं तो लोग कह रहे हैं कि उन्हें मौका दिया जाएगा। कई स्थानीय दिग्गज अधीर रंजन चौधरी के साथ दिखाई दे रहे हैं और माना जा रहा है कि पूरे बंगाल में कांग्रेस के लिए यह सीट सबसे ज्यादा मजबूत है। लोग कह रहे हैं कि पिछली बार गलती हो गई लेकिन इस बार दादा (अधीर रंजन) को जरूर जिताएंगे। ऐसे में अधीर रंजन चौधरी अपनी सीट के साथ-साथ आस पास की अन्य सीटों पर भी असर डाल सकते हैं।
किन सीटों पर बढ़ी मुश्किलें?
मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी ज्यादा है लेकिन मुस्लिम वोटों के लिए दावेदारों की लिस्ट भी बहुत लंबी है। ममता बनर्जी की मुश्किलें सबसे ज्यादा हुमायूं कबीर खुद रेजिनगर से चुनाव मैदान में उतरकर बढ़ा दी हैं। हुमायूं कबीर के खुद मैदान पर आने से यह साफ हो गया है कि पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस नेअ ताउर रहमान को और बीजेपी ने बापन घोष को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस के उम्मीदवार जिल्लू शेख भी को मैदान में उतारा है। इस सीट पर मुकाबला कांटे का होने की संभावना है। पिछली बार टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी ने 68 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार मामला फंसता हुआ नजर आ रहा है। मुस्लिम वोटों में अगर बिखराव होता है तो इस सीट पर बीजेपी के भी चांस बन सकते हैं।
इसके अलावा बहरामपुर सीट पर कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है। अधीर के सामने टीएमसी के नारू होपाल मुखर्जी और बीजेपी के सुब्रत मैत्रा मैदान में होंगे। अधीर रंजन चौधरी के प्रभाव वाली इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला भी देखने को मिल सकता है। इस सीट पर भी अच्छी खासी संख्या में मुस्लिम वोट हैं लेकिन अगर मुस्लिम वोट एकजुट होकर वोट नहीं करते तो कांग्रेस और टीएमसी के बजाय बीजेपी की जीत की ज्यादा संभावना है। पिछली बार भी बहुकोणीय मुकाबले में बीजेपी ने बाजी मार ली थी और सुब्रत मैत्रा विधानसभा पहुंचे थे।
मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से तीन बार के अनुभवी टीएमसी विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की और इसके बाद इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। उन्होंने यह फैसला इस बार टिकट न दिए जाने की नाराजगी के चलते किया। अब्दुर रज्जाक ने दावा किया कि इस बार टीएमसी के उम्मीदवार न केवल जलांगी में, बल्कि आसपास की डोमकल और रानीनगर विधानसभा सीटों पर भी हारेंगे। इस जिले की 22 सीटों पर मुकाबला काफी ज्यादा रोचक है। मुस्लिम बहुल जिला होने के बावजूद बीजेपी को इस जिले में संभावनाएं नजर आती हैं क्योंकि मुस्लिम वोटों में बंटवारे से सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
