हर बार चुनावों से पहले जब उम्मीदवार अपना पर्चा भरते हैं तो उनकी संपत्ति, पढ़ाई-लिखाई और आपराधिक रिकॉर्ड का पता चलता है। इसी से यह भी पता चल जाता है कि जिन लोगों को हम चुनने जा रहे हैं वे आखिर कितने पैसे वाले हैं। आम तौर पर यह देखा जाता है कि ज्यादातर उम्मीदवारों की संपत्ति करोड़ों में होती है। अब केरल के विधानसभा चुनाव में एक ऐसी उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने अपनी कुल संपत्ति सिर्फ 84 रुपये घोषित की है। रोचक बात है कि विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए जिस स्टैंप पेपर पर शपथ पत्र बनता है, वही 200 रुपये का आता है। विधानसभा चुनाव का पर्चा भर चुकीं आशना थंपी का कहना है कि उनके पास जितने पैसे थे, उनसे ही वह अपना पर्चा भर पाई हैं।
पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल कर चुकीं आशना लंबे समय से पार्टी सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) की उम्मीदवार हैं और लंबे समय से इस पार्टी के आंदोलनों में सक्रिय हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और नामांकन के लिए जरूरी पैसे भी आशना ने अपने दोस्तों, पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और अन्य लोगों से मांगकर जुटाए हैं। अभी उनका कहना है कि अपना प्रचार करने के लिए उन्हें 8 से 10 हजार रुपयों की जरूरत है। बता दें कि चुनाव आयोग के मुताबिक, एक उम्मीदवार विधानसभा चुनाव के लिए अधिकतम 40 लाख रुपये खर्च कर सकता है।
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एफिडेविट में क्या-क्या बताया?
कोट्टायम जिले की एत्तूमनूर विधानसभा सीट से पर्चा भरने वाली आशना थंपी सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) की उम्मीदवार हैं। अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने बताया है कि पर्चा भरते समय उनकी जेब में सिर्फ 40 रुपये थे। इतना ही नहीं, आशना के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में उनका एक खाता है जिसमें सिर्फ 44 रुपये थे। इस तरह कुल संपत्ति सिर्फ 84 रुपये बताई गई है। आशना के मुताबिक, उनके पास इसके अलावा न तो कोई चल संपत्ति है और न ही वह किसी अचल संपत्ति की मालिक हैं।
26 साल की आशना थंबी खुद एर्नाकुलम जिले की रहने वाली हैं और क्राउड फंडिंग के जरिए चुनाव लड़ रही हैं। वह खुद ही पर्चे लेकर बांट रही हैं और डोर टू डोर कैंपेन के जरिए अपना प्रचार कर रही हैं। इस तरह से चुनाव लड़ने के बारे में वह कहते हैं, 'मैं एक गरीब परिवार से आती हूं। मैं SUC पार्टी की सदस्य हूं। हम उन लोगों से ही पैसे ले रहे हैं जो हमारा समर्थन करते हैं। इसकी वजह यह है कि हम लोगों के लिए काम करते हैं। हम हमारे पास कोई मदद नहीं है। हम लोगों का आंदोलन करते हैं और उनसे ही पैसे लेते हैं।'
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तिरुवनंतपुरम में आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में भी आशना की अहम भूमिका रही है। फिलहाल, SUCI की मीडिया कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम कर रही आशना ने अपने बाल भी आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान ही काट डाले थे।
बता दें कि विधानसभा चुनाव का पर्चा भरने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों को 10 हजार रुपये और अनुसूचित जाति के लोगों को 5000 रुपये की सुरक्षा राशि जमा करानी होती है। एक निश्चित सीमा से कम वोट मिलने पर जमानत जब्त हो जाती है यानी ये पैसे वापस नहीं मिलते हैं।
