भारत की मशहूर लेखिका और बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल से अपना नाम वापस ले लिया है। उनके इस कदम से बवाल मच गया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि गाजा संकट पर महोत्सव की जूरी की टिप्पणियों से आहत और घृणित हूं। इस वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई है। अरुंधति रॉय 1989 में बनी फिल्म 'इन व्हिच एनी गिव्स इट दोज वन' के रिस्टोर वर्जन के लिए बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने वाली थीं।
अरुंधति रॉय ने एएफपी को दिए बयान में कहा, 'जूरी का बयान अमानवीय और गहरे खेद से भरा था।' जब जूरी सदस्यों से गाजा में युद्ध और इजरायल के प्रति जमर्नी के समर्थन को लेकर सवाल पूछा गया तो उनकी प्रतिक्रिया विचलित करने वाली थी।
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अरुंधति रॉय बर्लिन फिल्म फेस्टिवल से वापस लिया नाम
दरअसल 12 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी जिसमें जूरी अध्यक्ष और मशहूर फिल्म निर्माता विम वेंडर्स से गाजा संघर्ष पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा था कि सिनेमा को राजीति से दूर रहना चाहिए। इस बयान को सुनने के बाद अरुंधति राय ने पलटवार किया था।
अरुंधति ने कहा, 'कला को राजनीति से दूर रहना चाहिए। यह हैरान करने वाली बात है। हमारे समय के महानतम फिल्म निर्माता और कलाकार आगे खड़े होकर यह नहीं कह सकते हैं कि इजरायल गाजा में फिलिस्तीनी लोगों का नरसंहार कर रहा है तो उन्हें पता होना चाहिए कि इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।'
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क्यों खास है बर्लिन फिल्म फेस्टिवल?
बर्लिन फिल्म फेस्टिवल ने अरुंधति राय के फैसले का सम्मान किया है और उनका स्वागत नहीं कर पाने पर खेद व्यक्त किया है। बर्लिन फिल्म फेस्टिवल को बर्लिनाले के नाम से जाना जाता है। इस फेस्टिवल को राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए जाना जाता है लेकिन इस बार कई प्रमुख हस्तियां कुछ भी कहने से बच रही हैं।
7 अक्टूबर 2023 को गाजा युद्ध शुरू हुआ था। आधिकारिक इजरायली आंकड़ों के मुताबिक 1221 लोग मारे जा चुके हैं। इजरायल की सैन्य कार्रवाई में हमास शासित गाजा में स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 71,000 मौतें हुई हैं।
