फिल्म 'चुप चुप के' और 'भूल भुलैया' में अपनी कॉमेडी से सबको हंसाने वाले राजपाल यादव एक बार फिर जेल पहुंच गए हैं। 5 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 4:00 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में उन्हें सरेंडर करना पड़ा है। साल 2010 के एक मामले में उन्हें मुश्किलों में फंसना पड़ा है। राजपाल यादव पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए 'मुरली प्रोजेक्ट्स' से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था, जो अब ब्याज के साथ करीब 9 करोड़ रुपये हो चुका है।

 

हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 6 महीने की जेल सुनाई थी और हाई कोर्ट ने जून 2024 से उनकी सजा पर रोक लगा रखी थी, लेकिन बार-बार पैसे चुकाने के वादे में फेल हो जाने के बाद जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए राहत खत्म कर दी, जिसके बाद राजपाल के पास सरेंडर के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

 

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हाई कोर्ट ने क्यों की अर्जी खारिज?

राजपाल यादव ने जेल जाने से बचने के लिए आखिरी समय तक दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने उनकी एक न सुनी और उनकी अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया। जस्टिस स्वर्ण कांत ने काफी कड़े शब्दों में कहा कि राजपाल यादव ने एक-दो बार नहीं, बल्कि करीब 15 से 20 बार कोर्ट में पैसे लौटाने का वादा किया और हर बार मुकर गए हैं। 

 

कभी उन्होंने डिमांड ड्राफ्ट में 'लिखने की गलती' बताई तो कभी कोई और अजीब बहाना बनाया। कोर्ट ने साफ कह दिया कि धैर्य रखने की भी एक हद होती है और राजपाल जिस तरह से कोर्ट का समय बर्बाद कर रहे हैं, उसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी वजह से उन्हें कोई भी और समय देने से साफ मना कर दिया गया।

 

 

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कोर्ट का फैसला क्या है?

हाई कोर्ट से राहत खत्म होते ही राजपाल यादव ने खुद को सरेंडर कर दिया। कोर्ट के आदेशों और पैसों के लेन-देन में लापरवाही बरतने की वजह से अब उन्हें अपनी 6 महीने की सजा काटनी होगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजपाल यादव को अब जेल में ही रहना होगा।