बर्लिन के सोशल मीडिया गे इन्फ्लुएंसर अली दारविच इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में वह अपने दोस्तों को रमजान की इफ्तार पार्टी दे रहे हैं। इस वीडियो से साफ होता है कि अली दारविच रमजान का रोजा रख रहे हैं लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि मुस्लिम धर्म के शरिया कानून में समलैंगिकता को हराम माना जाता है। इसके बावजूद अली इस बात की फिक्र नहीं करते हैं और मुस्लिम धर्म तथा अपनी पहचान के बीच संतुलन बनाए हुए हैं।
अली दारविच 33 साल के हैं। वह फिलिस्तीनी और लेबनानी मूल के हैं लेकिन फिलहाल जर्मनी के बर्लिन में रहते हैं। अली दारविच के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स इन दिनों बढ़ते जा रहे हैं, क्योंकि लोगों को उनकी जिंदगी काफी पसंद आती है।
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समलैंगिकता पर क्या बोले दारविच?
इस इफ्तार पार्टी में अली दारविच के 15 दोस्त उनके घर आए थे जिसमें कई दूसरे धर्मों से भी थे। इस इफ्तार पार्टी में अली दारविच सबसे पहले खजूर खाकर रोजा तोड़ते हैं। इसके बाद अली दारविच कहते हैं,'आज रात हम यह संदेश देना चाहते हैं कि कोई व्यक्ति चाहे कहीं से भी आया हो, वह जिससे भी प्यार करता हो, वह समलैंगिक ही क्यों न हो क्योंकि हर व्यक्ति वैसा ही है जैसा उसे होना चाहिए।'
इसके बाद अली मुस्लिम धर्म को लेकर कहते हैं कि,'मैं आस्तिक हूं, मैं ईश्वर में विश्वास रखता हूं और मुझे इस्लाम उतना ही सुंदर लगता है जितना ईसाई धर्म, यहूदी धर्म और कई अन्य धर्म।' इसके बाद वह कहते हैं कि,'किसी भी धर्म में समलैंगिकों को स्वीकार किया जाना हमेशा आसान नहीं होता है।'
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होता है अकेलापन
इस इफ्तार पार्टी में अली दारविच मुस्लिम धर्म में समलैंगिकों के अकेलेपन के बारे में बात करते हैं। दारविच ने कहा कि उनके जैसे कई गे मुस्लिम लोगों को रमजान के दिनों में अकेलापन महसूस होता है, क्योंकि उन्हें मुस्लिम परिवारों द्वारा तिरस्कार का सामना करना पड़ता है। इसके बाद दारविच कहते हैं कि रमजान के दिन उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाते हैं, खासकर रमजान के दिन जब अक्सर लोग मिलजुल कर रोजा खोलते हैं।
