अमेरिका में भारतीय मूल के एक जज मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए गए हैं। केपी जॉर्ज को चुनाव प्रचार से संबंधित मामले में मनी लॉन्ड्रिंग करते हुए पकड़ा गया है। केपी जॉर्ज मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं। 2018 में वह टेक्सास के फोर्ट बेंड काउंटी के जज चुने गए थे और इस पद तक पहुंचने वाले पहले भारतीय व्यक्ति थे। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे थे।
कोर्ट में वकीलों ने दावा किया है कि केपी जॉर्ज ने अपने राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स का सहारा लिया और चुनावी चंदे का इस्तेमाल अपने निजी लाभ के लिए किया। दोषी ठहराए जाने के बाद केपी जॉर्ज को जज के पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है साथ ही उन्हें 10 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।
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क्या है पूरा मामला?
टेक्सास की एक कोर्ट में जज केपी जॉर्ज के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। जहां एक तरफ अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने आरोप लगाया है कि केपी जॉर्ज ने चुनावी फंड को अपनी निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया। इसके अलावा अभियोजन का दावा है कि केपी ने अलग-अलग राज्यों में अलग खातों में पैसे ट्रांसफर किए। वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकीलों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्षी पक्ष के पास अधूरी जानकारी है। केपी जॉर्ज ने गैरकानूनी तरीके से पैसों का इस्तेमाल नहीं किया है।
सजा मिली तो क्या हो सकता है?
अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी के आरोप कोर्ट में साबित नहीं कर पाया है लेकिन जूरी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केपी जॉर्ज को दोषी ठहराया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 10 साल की जेल की सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सजा सुनाए जाने के बाद से ही उन पर पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने शुरुआत में इन आरोपों को राजनीतिक रंजिश बताया था। कानून के मुताबिक दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें तुरंत पद से हटाया जा सकता है।
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भारतीय लोगों पर असर
केपी जॉर्ज की जीत को कभी अमेरिका में भारतीयों की बढ़ती राजनीतिक ताकत के रूप में देखा गया था लेकिन अब इस सजा ने वहां के भारतीय मूल के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।
