ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई जवाबी हमले की वसीयत तैयार करने में जुटे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ बैठक की। इसमें बताया कि अगर अमेरिका या इजरायल के हमले में उनकी मौत हो जाए तो ईरान कैसे पलटवार करेगा? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में अयातुल्ला अली खामेनेई ने आपातकालीन योजना और उत्तराधिकार आदेश पर चर्चा की। एक आंतरिक समूह भी बनाया। इसमें नेताओं और सैन्य अधिकारियों को जगह दी। यह समूह अली खामेनेई की हत्या होने या संचार बाधित होने की स्थिति में आगे के सभी फैसले लेने का जिम्मेदार होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक खामेनेई ने अपने अली लारीजानी की शक्तियों को बढ़ा दिया है। उनको ईरान से जुड़े मामलों की कमान सौंपी गई है। खामेनेई से ताकत मिलने के बाद से ही लारीजानी की निगरानी में विरोध प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है। अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता को मैनेज करने में लारीजानी ने अहम भूमिका निभाई थी। वे मौजूदा हालात में रूस, कतर और ओमान समेत अन्य देशों से समन्वय भी करने में जुटे हैं।
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लारीजानी की अगुवाई में युद्ध की तैयारी
अली लारीजानी की अगुवाई में ईरान युद्ध की तैयारी में भी जुटा है। मतलब साफ है कि ईरान के हर मामले में लारीजानी का खूब दखल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अली लारीजानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं। उनके पास सियासत का लंबा अनुभव है। उन्हें ईरान में अली खामेनेई का संकट मोचक माना जाता है। वे खामेनेई के बेहद वफादार है।
मध्य पूर्व में अमेरिका लगातार अपनी सेना की तैनाती बढ़ा रहा। इस बीच ईरान ने भी अपनी सभी सेनाओं को अलर्ट पर रखा है। इराक सीमा और फारस की खाड़ी के नजदीक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तैनात किया गया है।
'ईरानी शासन के अंत का समय करीब'
उधर, इजरायल वायुसेना के पूर्व प्रमुख मेजर जनरल एतान बेन एलियाहू ने का कहना है कि ईरानी शासन अपने अंत के करीब है। उनका दावा है कि ईरान अंदर से बंट चुका है। वहां विरोध प्रदर्शन और बढ़ेंगे।
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हमले के पक्ष में लिंडसे ग्राहम
उधर, अमेरिकी सीनेटर और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम ने यूएस राष्ट्रपति से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तरफ बढ़ने का आग्रह किया है। उन्होंने ईरान के खिलाफ संयम बरतने की सलाह देने वाले अधिकारियों के प्रति ट्रंप को आगाह भी किया है। उन्होंने कहा, अतीत में हुए संघर्षों को देखते हुए मध्य पूर्व में बड़े सैन्य अभियानों को लेकर चिंताएं मेरी समझ में आती हैं। हालांकि जो लोग इस तरह के संघर्षों में उलझने से बचने की सलाह देते हैं। वे बुराई को बेरोकटोक बढ़ने देने के नतीजों को नजरअंदाज करते हैं।'
