ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले का असर अब दुनियाभर में दिखने लगा है।  ईरान के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से इंटरनेशल पावर सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। जलडमरूमध्य तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता था। अब इसके बंद होने से LNG की सप्लाई पर असर पड़ा है जिसका सीधा असर आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। 

 

इस संकट को देखते हुए सरकार भी अब एक्शन में आ गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही नए सप्लाई सिस्टम को तैयार कर सकता है। संभव है कि यह व्यवस्था आज यानी मंगलवार से ही लागू हो जाए। सरकार फर्टिलाइजर जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों समेत अलग-अलग उद्योगों के लिए गैस सप्लाई प्लान ला रही है। हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फर्टिलाइजर सेक्टर में सप्लाई में कुछ कमी किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 

 

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क्यों आया यह संकट?

मौजूदा संकट की जड़ मिडल ईस्ट में है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया जिसके बाद से इस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन हमलों के बाद से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है। यह इंटरनेशन तेल सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता था। कतर ने अपनी एलएनजी प्रोडक्शन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। भारत के लिए यह इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत की 52 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है। 

 

इसके बंद होने से वैश्विक तेल कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो फरवरी 2026 के 72 डॉलर से 15 प्रतिशत ज्यादा है। इसका असर भारत में साफ दिखाई दे रहा है। घरों के किचन में इस्तेमाल होने वाली कुकिंग गैस एलपीजी की कीमतें 7 प्रतिशत बढ़तक दिल्ली में 913 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम हो गई है। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर 1,883 रुपये का हो गया है। 

क्या असर पड़ेगा?

इस संकट का असर आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। एलएनजी का उपयोग सिर्फ कारखानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में पाइप वाली गैस, गाड़ियों में सीएनजी, बिजली उत्पादन और एग्रीकल्चर के लिए फर्टीलाइजर के लिए इसी गैस का इस्तेमाल किया जाता है। गैस की सप्लाई कम होने से इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे ट्रांसपोर्ट, माल ढुलाई और रोजमर्रा के उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। 

किन उद्योगों पर पड़ेगा असर?

सरकार के नए ऑप्टिमाइजेशन प्लान के तहत गैस की सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटी जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, गैर-प्राथमिकता वाले सेक्टरों को गैस सप्लाई में भारी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। उन उद्योगों को तुरंत कोयला, नेफ्था या फर्नेस ऑयल जैसे वैक्लपिक ईंधनों की ओर रुख करना पड़ सकता है। 

 

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फर्टिलाइजेशन सेक्टर में होगी कटौती

फर्टिलाइजेशन सेक्टर में एनएनजी गैस का काफी ज्यादा इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली 60 प्रतिशत एनएनजी अकेले कतर से आती है। कतर की एनर्जी यूनिट्स पर ईरान ने हमले किए, जिसके बाद से कतर ने प्रोडक्शन अस्थायी रूप से बंद कर दी है। ऐसे में भारत की सप्लाई पर असर पड़ा है। फर्टिलाइजर सेक्टर सरकार की प्राथमिकता है लेकिन फिर भी इसमें कटौती की जा सकती है। हालांकि, किसानों के लिए राहत की खबर है कि सरकार के पास फर्टिलाइजर के भंडार हैं। ऐसे में एलएनजी की सप्लाई कम होने पर भी किसानों को आसानी से फर्टिलाइजर्स मिल जाएंगे।