पाकिस्तान में सांसदों और विधायकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ECP) ने शुक्रवार को 159 सांसदों और विधायकों की सदस्यता तुरंत प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दी है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इन लोगों ने पिछले वित्तीय साल (2024-25) की अपनी संपत्ति का ब्यौरा समय पर जमा नहीं किया।

 

यह जानकारी चुनाव आयोग के एक नोटिफिकेशन से सामने आई है। नियम के अनुसार, हर साल 31 दिसंबर तक सांसदों और विधायकों को अपनी, अपनी पत्नी और बच्चों की संपत्ति का ब्यौरा चुनाव आयोग को देना जरूरी होता है। अगर 15 जनवरी तक यह नहीं दिया जाता, तो 16 जनवरी को उनकी सदस्यता अपने आप निलंबित हो जाती है।

 

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किन-किन बड़े नामों पर गिरी गाज?

इस लिस्ट में फेडरल क्लाइमेट चेंज मंत्री मुसादिक मलिक, फेडरल एजुकेशन मंत्री खालिद मकबूल सिद्दीकी, सिंध के लेबर मंत्री सईद गनी और सिंध के एक्साइज एंड टैक्सेशन मंत्री मुकेश कुमार चावला जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

 

इसके अलावा सिंध के पूर्व मुख्यमंत्री कैम अली शाह, बलूचिस्तान कै पूर्व चीफ मिनिस्टर अख्तर मेंगल और सीनेट चेयरमैन यूसुफ रजा गिलानी के दो बेटे, अली मूसा गिलानी और अब्दुल कादिर गिलानी भी इस लिस्ट में हैं। गिलानी के दोनों बेटे मुल्तान से नेशनल असेंबली के सदस्य हैं।

कहां से कितने प्रभावित?

संख्या की बात करें तो इसका आंकड़ा कुछ यूं है-

  • नेशनल असेंबली: 32

  • पंजाब असेंबली: 50

  • सिंध असेंबली: 33

  • खैबर पख्तूनख्वा असेंबली: 28

  • बलूचिस्तान असेंबली: 7

  • सीनेट: 9

क्या होगा अब?

इन सभी सांसदों को तब तक संसद या विधानसभा की बैठक में हिस्सा लेने या कोई आधिकारिक काम करने की इजाजत नहीं होगी, जब तक वे अपनी संपत्ति का ब्यौरा चुनाव आयोग के पास जमा नहीं कर देते। जैसे ही ब्यौरा जमा होगा, चुनाव आयोग उनकी सदस्यता बहाल कर देगा।

 

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यह नियम इलेक्शंस एक्ट 2017 की धारा 137 के तहत लागू होता है। चुनाव आयोग ने 1 जनवरी को भी उन लोगों की लिस्ट जारी की थी जिन्होंने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया था। उसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कैबिनेट के कई मंत्री भी शामिल थे।