अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्तों की जंग के बाद अब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है। यह बैठक पाकिस्तान में हो रही है। साल 1979 में ईरान इस्लामिक रिपब्लिक बना था, तब से लेकर अमेरिका और ईरान के रिश्ते हमेशा तल्ख रहे। दशकों बाद, अब दोनों देशों के बीच पहली ऐसी बड़ी बैठक हो रही है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका की तरफ से बातचीत का नेतृत्व करेंगे, जबकि ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ प्रमुख होंगे। यह बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होनी है। 

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झुकने के लिए तैयार नहीं ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते का युद्धविराम घोषित किया था। मकसद था कि बातचीत का रास्ता साफ हो सके। यह युद्धविराम काफी कमजोर साबित हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप, बार-बार ईरान को युद्ध की धमकी दे रहे हैं। ईरान भी झुकने के लिए तैयार नहीं है।

अमेरिका क्या शर्तें तय कर रहा है?

डोनाल्ड ट्रंप की मुख्य शर्त है कि होर्मुज को तुरंत, मुफ्त, पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से फिर से खोल दिया जाए, लेकिन यह शर्त अभी पूरी नहीं हुई है। ईरान कह रहा है कि युद्धविराम में लेबनान को भी शामिल किया जाए, जहां वह हिजबुल्लाह का समर्थन करता है। जेडी वेंस, इस मांग को गलतफहमी बता रहे हैं।

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ईरान का हाल क्या है?

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान की मिसाइल और ड्रोन बनाने की फैक्टरियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम भी कई साल पीछे चला गया है। ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी हालत में है। ईरानी लोग भी यह जंग नहीं चाहते हैं।

होर्मुज पर क्या नियंत्रण खत्म करेगा ईरान?

ईरान का दावा है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण हासिल किया है। वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना सकता है। ईरान इसे अपनी नई ताकत मान रहा है। दुनियाभर के लोग डरे हुए हैं कि ऐसी उच्च स्तरीय बैठक, बिना किसी रणनीति के हो रही है, यह दुनिया को नए जोखिम में डाल सकती है।

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ईरान और अमेरिका क्या चाहते हैं?

ईरान खुद को ताकतवर दिखाने की कोशिश करेगा, जबकि अमेरिका की कोशिश होगी कि ईरान को नई स्थिति को मान्यता न मिले। अगर बातचीत सफल होती है तो यह ईरान के लिए बड़ा झटका हो सकता है। ईरान हमेशा से अमेरिका को 'ग्रेट सैटन' कहकर उससे सीधी बातचीत से बचता रहा है। ईरान के लोग, अमेरिका को शैतान मानते हैं। अब इस बैठक से वह पुरानी नीति टूट सकती है। डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस से अमेरिकी उम्मीद कर रहे हैं कि वे ईरान पर सख्त नीति अपनाएंगे, जिससे ईरान पश्चिम एशिया के लिए संकट न बने।

कहां अटेगी बात?

ईरान ने इस जंग में साबित किया है कि वह कमजोर नहीं है। एक साथ, खाड़ी के सारे देश, इजरायल और अमेरिका से लड़कर, उन्हें संधि वार्ता के लिए मजबूर किया है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया जाए, अब ईरान इस पर तैयार नहीं होगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से पैसे वसूलेगा, ईरान को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई इसी से की जाएगी। ईरान, अपने परमाणु कार्यक्रमों से अब न हटने का वादा ईरानी जनता से कर चुका है। अगर ईरान नहीं माना तो फिर से सख्त आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई का खतरा रहेगा। ईरान ने अपने इरादे साफ किए हैं कि यह देश झुकने वाला नहीं है। 

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क्या आएगी शांति?

इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक बेहद अहम है। नतीजे तुरंत नहीं निकल सकते, लेकिन इससे दोनों तरफ की स्थिति और ताकत का पता चलेगा। डोनाल्ड ट्रंप का यह पाकिस्तान दांव कामयाब होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। बातचीत से शांति मिलेगी या सिर्फ समय बर्बाद होगा, यह अभी कहना मुश्किल है।