दिल्ली में वायु प्रदूषण से हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दिल्ली में अब भी AQI का स्तर 'बहुत खराब' बना हुआ है। शनिवार सुबह दिल्ली में AQI का स्तर 339 रहा, जो 'बहुत खराब' की श्रेणी में आता है। हालांकि, शुक्रवार की तुलना में हवा थोड़ी साफ हुई है। शुक्रवार को AQI का स्तर 369 था।
मगर क्या ऐसा हालात सिर्फ दिल्ली के ही हैं? ऐसा नहीं है। अब एक नई स्टडी आई है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत में एक भी ऐसी मेट्रो सिटी नहीं है, जहां 'साफ हवा' हो। इतना ही नहीं, स्टडी यह भी बताती है कि इन मेट्रो सिटी में 10 साल में कभी भी हवा साफ नहीं रही।
जिस स्टडी में यह दावा किया गया है, उसे पर्यावरण पर काम करने वाली फर्म क्लाइमेट ट्रेंड्स ने तैयार किया है। क्लाइमेट ट्रेंड्स ने 11 बड़े शहरों के पिछले 10 साल के AQI का एनालिसिस किया है। इसमें बताया गया है कि 2016 से 2025 के बीच 10 साल में इन 11 शहरों में से किसी भी शहर में साफ हवा नहीं रही है।
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दिल्ली की हवा में थोड़ा सुधार
स्टडी बताती है कि दिल्ली अब भी सबसे प्रदूषित शहर है। दिल्ली का 2016 में AQI का औसत स्तर 250 था, जबकि 2025 में यह 180 आ गया। इसका मतलब हुआ कि दिल्ली की हवा में सुधार हुआ है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की स्टडी के मुताबिक, 2019 के बाद से दिल्ली की हवा में थोड़ा सुधार आना शुरू हुआ है। हालांकि, सुधार होने के बावजूद दिल्ली की हवा 10 साल में कभी भी ऐसी नहीं रही, जिसे 'स्वस्थ' माना जा सके।
स्टडी में बताया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। इसके बाद इंडस्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और पराली जलाना भी इसका एक बड़ा कारण है।
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बाकी शहरों में कैसे हैं हालात?
स्टडी बताती है कि जहरीली हवा से सिर्फ दिल्ली वाले ही परेशान नहीं हैं, बल्कि बाकी बड़े शहरों में भी कमोबेश ऐसा ही हाल है।
स्टडी कहती है कि लखनऊ, वाराणसी और अहमदाबाद जैसे शहरों में 10 साल के शुरुआती कुछ सालों में AQI का स्तर 200 से ऊपर रहा है। हालांकि बाद के कुछ सालों में इसमें थोड़ा सुधार भी हुआ।
जबकि मुंबई, चेन्नई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में उत्तर भारतीय शहरों की तुलना में AQI का स्तर थोड़ा कम ही रहा। हालांकि, तब भी यहां की हवा कभी साफ नहीं रहा।
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बेंगलुरु में सबसे कम प्रदूषण
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, AQI का स्तर जब 0 से 50 के बीच रहता है तो उसे 'अच्छा' माना जाता है। 51 से 100 के बीच होने पर 'संतोषजनक' और 101 से 200 के बीच होने पर 'मध्यम' माना जाता है। AQI का स्तर अगर 201 से 300 के बीच रहता है तो इसे 'खराब' माना जाता है। वहीं, यह स्तर 301 से 400 के बीच होने पर 'बहुत खराब' और 400 के पार होने पर 'गंभीर' माना जाता है।
स्टडी कहती है कि मुंबई, चेन्नई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में 10 साल में AQI का स्तर 65 से 90 के बीच रहा, जिसे 'संतोषजनक' माना जाता है।
इस साल मुंबई का औसत AQI 83, कोलकाता का 85, चेन्नई का 75 और बेंगलुरु का 72 दर्ज किया गया है। मेट्रो सिटी में बेंगलुरु ही ऐसा शहर है जहां की हवा सबसे कम प्रदूषित है। हालांकि, इसके बावजूद यहां की हवा साफ नहीं है।
