केंद्र सरकार ने कांग्रेस पार्टी को दिल्ली के अपने पुराने ऑफिस 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड पर स्थित दफ्तर को शनिवार (28 मार्च) तक खाली करने का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है। असल में कांग्रेस का अपना नया चमचमाता मुख्यालय 'इंदिरा भवन' साल 2025 में ही बनकर तैयार हो चुका है। सरकारी नियमों के मुताबिक, जब किसी राजनीतिक दल का अपना निजी ऑफिस बन जाता है, तो उन्हें पहले से नियुक्त सरकारी बंगले सरकार को वापस सौंपने होते हैं।

 

शहरी विकास मंत्रालय ने ये नोटिस 13 मार्च को ही जारी कर दिए थे, जो हाल ही में कांग्रेस नेताओं को प्राप्त हुए हैं। 24 अकबर रोड दशकों से कांग्रेस की राजनीति का मुख्य केंद्र रहा है लेकिन अब शनिवार की समय सीमा ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस इस बेदखली के आदेश के खिलाफ अब अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है ताकि इन ऑफिस को खाली करने की प्रक्रिया पर रोक लग सके।

 

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क्या है सरकारी ऑफिस खाली करने का नियम?

यह पूरा मामला साल 2006 की उस सरकारी पॉलिसी पर है जिसके मुताबिक नेशनल पार्टियों को दिल्ली में अपना ऑफिस बनाने के लिए जमीन दी जाती है। नियम बहुत साफ है कि जिस दिन किसी पार्टी को जमीन मिल जाती है, उसके ठीक तीन साल के भीतर उन्हें पुराने सरकारी बंगले खाली करने होते हैं। अगर पार्टी अपना नया मुख्यालय (जैसे कांग्रेस का इंदिरा भवन) समय से पहले तैयार कर लेती है तो काम पूरा होते ही पुराने ऑफिस सरकार को वापस करने होते हैं। इसी नियम के आधार पर अब कांग्रेस को 24 अकबर रोड छोड़ने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।

क्या अन्य राजनीतिक दलों पर भी लागू होते हैं ये नियम?

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नियमों का पालन करने का यह दबाव सभी राजनीतिक दलों पर समान रुप से रहता है। बीजेपी ने भी साल 2018 में अपना नया मुख्यालय बना लिया था लेकिन उन्होंने अपना पुराना 11 अशोक रोड वाला बंगला साल 2024 तक अपने पास रखा था, जिसे बाद में एक सांसद को नियुक्त कर दिया गया। सरकार ने अब साफ कर दिया है कि सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया का पालन करना होगा और साल 2022 में भी मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसके साफ संकेत दिए थे।

 

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ऑफिस खाली करने और किराया भरने के नियम

पार्टियों को जो सकारी जमीन दी जाती है, उसका प्रीमियम और सालाना किराया समय पर भरना जरूरी होता है। यह जमीन सिर्फ लीज पर दी जाती है और इसे निजी संपत्ति में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई पार्टी भुगतान में देरी करती है या तय समय के बाद भी सरकारी बंगलों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो सरकार के पास नियुक्त ऑफिस रद्द करने का पूरा अधिकार होता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस शनिवार तक ऑफिस करती है या कोई कानूनी रास्ता निकालती है।