एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने डीजल-पेट्रोल का इस्तेमाल कम करने और सार्वजनिक परिवहन के साधनों से आने-जाने की अपील की है। दूसरी तरफ डीजल-पेट्रोल के दाम दो बार बढ़ चुके हैं। इस बीच दिल्ली-एनसीआर के ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों ने 3 दिन की हड़ताल का एलान कर दिया है। ड्राइवरों के यूनियन का कहना है कि पिछले 15 साल में किराए में कोई इजाफा नहीं हुआ है इसलिए 21 से 23 मई तक वे हड़ताल करने जा रहे हैं। उन्होंने किराए में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की है। इन संगठनों ने तेल के बढ़ते दाम पर भी चिंता जताई है।
ड्राइवरों के संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री रेखा वर्मा, परिवहन मंत्री और दिल्ली पुलिस के कमिश्नवर को चिट्ठी लिखकर अपने प्रदर्शन और हड़ताल की जानकारी दी है। बताया गया है कि 23 मई को ऑटो और टैक्सी के ड्राइवर दिल्ली सचिवालय का घेराव करेंगे। अगर यह हड़ताल होती है तो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले लोगों को समस्या हो सकती है। उधर हरियाणा में एलान किया गया है कि टैक्सी सर्विस के लिए सिर्फ बैटरी वाली गाडियों और सीएनजी वाली गाड़िओं को ही अनुमति दी जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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क्यों हड़ताल की तैयारी कर रहे ड्राइवर?
अपनी चिट्ठी में ड्राइवरों ने लिखा है कि पिछले 15 साल से टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, इतने समय में सीएनजी, डीजल-पेट्रोल, गाड़ी के पार्ट्स, फिटनेस, परमिट और बाकी हर चीज के दाम बढ़ चुके हैं लेकिन टैक्सी का किराया आज भी पुराने स्तर पर ही चल रहा है। चिट्ठी में आगे लिखा है, 'दिल्ली का टैक्सी चालक आज आर्थिक संकट और भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है। ड्राइवर दिन-रात मेहनत करने के बावजूद अपने परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की शिक्षा और घर का खर्च चलाने में असमर्थ हो रहा है। कई बार दिल्ली सरकार के सामने किराए में संशोधन की मांग रखी गई लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मजबूर होकर चालक शक्ति यूनियन हाई कोर्ट गया। हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश बी दिए लेकिन दिल्ली सरकार बहाने बनाती रही और यह कहकर टाल दिया कि एलजी साहब के पास फाइल भेज दी गई। दुख है कि पिछले 4 महीने से फाइल पड़ी हुई है और कोई निर्णय नहीं हुआ है।'
इसी चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि ओला, ऊबर और रैपिडो जैसी कंपनियां मनमानी कर रही हैं और ड्राइवर इनके आर्थिक शोषण का शिकार होकर गुलामी जैसा जीवन जीने को मजबूर है। यूनियन ने यह भी कहा है कि अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो अगले एक-दो महीने में इसे महाआंदोलन में बदला जाएगा और इसकी जिम्मेदार दिल्ली सरकार होगी। इनकी अपील है कि किराया तत्काल बढ़ाया जाए और यही किराया ऐप आधारित कंपनियों पर भी लागू हो।
कितना है किराया?
दिल्ली में साल 2016 में आखिरी बार किराए में बदलाव किया गया था। तब पहले दो किलोमीटर के लिए ऑटो का किराया 19 रुपये और उसके बाद 6.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया था। नाइट चार्ज 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा, वेटिंग चार्ज 30 रुपये प्रति घंटा और एतिरिक्त सामान के लिए 7.5 रुपये अतिरिक्त है।
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इसी तरह टैक्सी का पहले किलोमीटर के लिए किराया 20 रुपये उसके बाद 11 रुपये प्रति किलोमीटर है। वहीं, एसी टैक्सी के लिए 13 रुपये प्रति किलोमीटर है। टैक्सी में भी नाइट चार्ज 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा और वेटिंग चार्ज 30 रुपये घंटा है।
कितना होगा असर?
बता दें कि दिल्ली में मेट्रो और बस के अलावा एक बड़ी आबादी ऑटो और टैक्सी में भी सफर करती है। हजारों लोगों के परिवार इसी से चलते हैं। साल 2022 तक ही दिल्ली में 92 हजार से ज्यादा ऑटो रिक्शा और 85 हजार से ज्यादा टैक्सी थी। अब लाखों की संख्या में प्राइवेट कैब हैं जिनमें कार चलती हैं। अगर किराए के चलते ऑटो और टैक्सी के ड्राइवर हड़ताल पर जाते हैं तो लाखों लोगों को समस्या हो सकती है और परिवहन व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
