कैलेंडर में तारीख बदलती है, साल बदलता मगर हालात नहीं। दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों की कहानी यही है। एक समय था जब दिल्ली-एनसीआर की हवा भी साफ हुआ करती थी। मगर सालों से यहां की हवा जहरीली बनी हुई है। अभी भी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI का स्तर 276 पर है, जो 'खराब' माना जाता है। यही हाल नोएडा का भी है।
सरकारें तो खूब हवा को साफ बनाने का खूब दावा करती हैं। मगर सच्चाई यह है कि प्रदूषण को काबू करने के लिए जितना फंड मिलता है, उसका इस्तेमाल ही नहीं किया जाता।
फाउंडेशन फॉर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस (ResGov) ने एक स्टडी की है और बताया है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत दिल्ली-एनसीआर को जो फंड मिला है, उसका या तो उसका इस्तेमाल ही नहीं हुआ या कम हुआ है, वह भी सड़कों से धूल साफ करने के लिए। यह हालात तब हैं जब दिल्ली और नोएडा देश के दो सबसे प्रदूषित शहर हैं।
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स्टडी में क्या आया?
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने NCAP शुरू किया था। यह वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए देश का पहला नेशनल प्रोग्राम है, जिसका मकसद 2026 तक 130 हाई रिस्क शहरों में PM2.5 को 40% तक कम करना है।
स्टडी में सामने आया है कि 2020-21 से 2025-26 तक दिल्ली के लिए NCAP के तहत 113 करोड़ रुपये मंजूर हुए। इसमें से 23 दिसंबर तक दिल्ली को 81 करोड़ रुपये जारी किए गए लेकिन सिर्फ 14 करोड़ यानी 12% ही खर्च किए गए।
यह खर्च नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) ने किया था। इसका पूरा इस्तेमाल सड़कों से धूल और कचरा हटाने में किया गया। इसमें कहा गया है कि अगर दिल्ली की परफॉर्मेंस अच्छी होती तो उसे इतने सालों में 209 करोड़ रुपये तक मिल सकते थे।
फंड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल 2022-23 में हुआ। जब फंड का 22% खर्च किया गया लेकिन उसके बाद तेजी से गिरावट आई। 2024-25 में फंड का सिर्फ 2% ही इस्तेमाल किया गया। जबकि, 2025-26 में तो कुछ खर्च ही नहीं हुआ।
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नोएडा ने कितना खर्च किया?
स्टडी बताती है कि नोएडा को 2020-21 और 2025-26 के बीच NCAP के तहत 127 करोड़ रुपये मंजूर हुए। इस साल 4 जनवरी तक 56 करोड़ रुपये जारी किए गए थे और इसमें से लगभग 24% यानी 30 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
कई सालों तक इस्तेमाल बहुत कम था। 2020-21 और 2024-25 के बीच सिर्फ 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो पूरी तरह से सड़क की धूल कम करने पर खर्च हुए, जिसमें वॉटर स्प्रिंकलर, मशीनी स्वीपर और एंटी-स्मॉग गन शामिल थे। फंड का इस्तेमाल 2025-26 में बढ़ा, हालांकि खर्च का डिटेल ब्रेक-अप सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया था।
नोएडा के एयर एक्शन प्लान में गाड़ियों, सड़क की धूल, कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्री, कचरा जलाने और खेती के कचरे को जलाने को प्रदूषण के मुख्य सोर्स के रूप में पहचाना गया है। हालांकि, हाल तक NCAP के लगभग सभी फंड सिर्फ धूल कम करने पर ही लगाए गए थे।
