पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी रणनीति तैयार करने वाली संस्था I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार, 13 अप्रैल को दिल्ली से हुई इस गिरफ्तारी ने बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है। चंदेल पर बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का गंभीर आरोप है।

 

माना जा रहा है कि चुनावी माहौल के बीच इस गिरफ्तारी से TMC के प्रचार अभियान को बड़ा झटका लग सकता है। विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब बंगाल में दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) के मतदान की तैयारियां अंतिम दौर में हैं।

 

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क्यों गिरफ्तार किया गया?

ED की जांच में सामने आया है कि आसनसोल क्षेत्र में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से हुई कोयला तस्करी का पैसा अवैध रास्तों से I-PAC तक पहुंचा। जांच एजेंसी का आरोप है कि करीब 20 करोड़ रुपये की काली कमाई को 'हवाला' ऑपरेटर्स और मुंबई की एक 'अंगड़िया' फर्म के जरिए घुमाकर I-PAC के खातों में डाला गया। यह मामला 2020 में CBI द्वारा दर्ज की गई FIR पर आधारित है, जिसकी कड़ियां अब राजनीतिक रणनीतिकारों से जुड़ती दिख रही हैं।

 

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी अचानक नहीं हुई है, बल्कि ED लंबे समय से इस सिंडिकेट पर नजर रख रही थी। इसी साल 8 जनवरी को जब कोलकाता स्थित I-PAC दफ्तर पर छापेमारी हुई थी, तब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गई थीं, जिससे बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में भी कई अधिकारियों के ठिकानों पर रेड मारी गई थी। अब गिरफ्तारी के बाद ED यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या घोटाले का पैसा चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हुआ है।

 

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पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर आई, बंगाल में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। TMC ने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'हताशापूर्ण कोशिश' करार दिया है।