भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच लंबे समय से चल रहा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समाप्त हो गया है। यह काफी ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है। इस मौके पर यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियोक लुइस सैंटोस डा कोस्टा ने कहा कि भारत से उनका गहरा नाता है। उन्होंने कहा कि भारत के गोवा से उनकी जड़ें जुड़ती हैं।

 

कोस्टा ने बताया कि उनके दादा का जन्म उस वक्त की पुर्तगाली कॉलोनी गोवा में हुआ था और अपने मरने तक वह वहीं पर रहे। उनके पिता ओरलैंडो डा कोस्टा जाने माने लेखक थे जिनके लेखन में गोवा का प्रभाव दिखता है। उन्होंने कहा कि उनके पिता को अभी तक कोंकणी निकनेम 'बाबुश' के नाम से जाना जाता है।

 

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कोस्टा ने कहा, 'मैं यूरोपियन काउंसिल का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं ओवरसीज इंडियन सिटीजन भी हूं। इसका मेरे लिए खासा महत्त्व है। मैं इस बात को लेकर काफी गर्व महसूस कर रहा हूं कि मेरी जड़ें गोवा में हैं।'

क्या हुई ट्रेड डील

भारत और यूरोप के बीच हुई इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। यूरोपियन यूनियन के नेताओं और भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर दस्तखत कर दिए हैं। इस फैसले से यूरोप के 27 देशों के साथ भारत का कारोबार सस्ता हो जाएगा।

 

सस्ता का मतलब यह है कि इन देशों में अगर भारत के कारोबारी अपना सामान बेचेंगे तो कम टैक्स देना पड़ेगा। साथ ही, अगर भारत के कारोबारी इन देशों से आयात करेंगे तब भी कम टैक्स लगेगा। नतीजा यह होगा कि कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, भारत और यूरोप के देशों में लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी।

 

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 136.53 बिलियन डॉलर यानी कि करीब 12 लाख करोड़ का सालाना व्यापार होता है, जिसमें 76 अरब डॉलर का निर्यात औऱ 60 अरब डॉलर का आयात किया जाता है।

क्या बोलीं उर्सुला

इस मौके पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हमने 2 बिलियन लोगों के लिए फ्री ट्रेड जोन का निर्माण किया है। यह सिर्फ शुरुआत है। हम अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देंगे।

 

पीएम मोदी ने भी इस एग्रीमेंट का स्वागत किया और कहा कि यह दुनिया का विश्वास भारत में बढ़ाएगा व मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को इससे बूस्ट मिलेगा।