पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब हवाई यातायात पर पड़ने लगा है। देशभर की कई एयरलाइंस ने जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। इस वजह से अब हवाई सफर भी महंगा हो गया है। एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो के बाद अब अकासा एयर ने फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी की है। यह नई दर 15 मार्च से सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट पर लागू होगी। कंपनी ने 199 से 1300 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज लगाया है। इस बीच स्पाइसजेट ने भी कहा कि अगर ईंधन की कीमतें नहीं गिरती हैं तो उसे भी सरचार्ज लगाना पड़ सकता है।
एयर इंडिया ग्रुप: एयर इंडिया ग्रुप ने सबसे पहले 12 मार्च को अपनी फ्लाइट पर 399 रुपये से 18,100 तक का फ्यूल सरचार्ज लगाने का ऐलान किया। कंपनी तीन चरणों में फ्यूल सरचार्ज में इजाफा करेगी। पहले चरण में घरेलू और सार्क देशों के बीच चलने वाली फ्लाइट पर 399 रुपये। वहीं मध्य पूर्व मार्गों पर 10 रुपये और दक्षिण पूर्व एशिया के मार्गों पर 60 रुपये शुल्क की घोषणा की। दूसरे चरण की शुरुआत 18 मार्च से होनी है। इसके तहत यूरोप जाने वाली फ्लाइट पर 125 और उत्तरी अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया की उड़ान पर 200 डॉलर का चार्ज लगेगा। तीसरे चरण में दक्षिण कोरिया और जापान के रूट को शामिल किया जाएगा।
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इंडिगो: 13 मार्च को इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया। कंपनी ने कहा कि 14 मार्च को 00:01 बजे के बाद की जाने वाली सभी नई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुकिंग पर 425 रुपये से 2300 रुपये तक का अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगेगा। कंपनी ने बताया कि मध्य पूर्व में तनाव की वजह से यह कदम उठाना पड़ा है। बता दें कि बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। यही कारण है कि इससे लाखों देशवासी प्रभावित होंगे।
- घरेलू और भारतीय उपमहाद्वीप: 425 रुपये
- मध्य पूर्व: 900 रुपये
- दक्षिण पूर्व एशिया, चीन और अफ्रीका: 1800 रुपये
- यूरोप: 2300 रुपये
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क्यों एयरलाइंस को बढ़ानी पर रही कीमत?
अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया। तब से अब तक जेट ईंधन की कीमत अब तक लगभग दोगुनी हो चुकी है। मध्य पूर्व में तनाव युद्ध के बीच तेल उत्पादन और सप्लाई काफी प्रभावित हुआ है। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण एयरलाइंस को फ्लाइट की कीमतों को बढ़ाना पड़ रहा है। फारस की खाड़ी में ईरान की हमले के कारण वाणिज्यिक जहाजों का स्वतंत्र तौर पर आवाजाही नहीं हो पा रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से गैसोलीन की कीमत भी बढ़ रही है। इसका असर सीधे जेट फ्यूल पर हो रहा है। एक वजह यह भी है कि मध्य पूर्व में एयरस्पेस बंद है। इस वजह से फ्लाइट को अपना रूट बदलना पड़ा रहा है। लंबे रास्ते के कारण ऑपरेटिंग लागत बढ़ रही है और अधिक ईंधन खर्च होता है।
