सोमनाथ मंदिर पर आक्रांता महमूद गजनवी के पहले हमले के 1000 साल पूरे हो गए हैं। सोमनाथ आज भी अडिग है, खड़ा है, भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि मंदिरों में से एक है। अनगिनत बलिदानों के साक्षी रहे इस मंदिर का अतीत हजारों साल पुराना है। सोमनाथ मंदिर ने अफगानी आक्रातांओं को देखा, मुगलों को देखा, अंग्रेजों को देखा, सब बीत गए, सोमनाथ मंदिर का अस्तित्व कायम है। 

भारतीय धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग बताए जाते हैं। सोमनाथ, उन ज्योतिर्लिंगों में पहला है। ऐसी मान्यता है कि सोमनाथ मंदिर को चंद्रदेव सोमराज ने बनवाया था। यह मंदिर, ऋगवेद कालीन है। गुजरात के सौराष्ट्र में, वेरावल के पास यह मंदिर, प्रभास पाटन में समुद्र तट पर स्थित है। समुद्री तट नजदीक है, इसलिए आक्रांताओं का यहां तक पहुंचना, हमेशा आसान रहा। इस मंदिर ने जितने हमले झेले, शायद की किसी दूसरे मंदिर ने देखे हों। 

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अल्लामा इकबाल ने कभी हिंदुस्तान के लिए जो शेर लिखे थे, वह सोमनाथ मंदिर के लिए भी प्रासंगिक है। उन्होंने लिखा था-

''यूनान ओ मिस्र ओ रूमा सब मिट गए जहां से
अब तक मगर है बाकी नाम-ओ-निशां हमारा,
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा।''

भारत के सबसे समृद्ध मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को हर दौर में लूटा गया। मंदिर की ख्याति ऐसी थी कि अरब यात्री अल बिरूनी ने अपने यात्रा वृत्तांत 'किताब-उल-हिंद' में वर्णन किया। अल-बिरूनी 11वीं शताब्दी के प्रसिद्ध फारसी विद्वान था। वह महमूद गजनवी के साथ भारत आए था। अपनी किताब तहकीक-ए-हिंद में बताया है कि यह मंदिर वृहद था। सैकड़ों देवदासियां और सैनिक यहां रहते थे। यह हिंदुओं के पवित्र स्थलों में शामिल है, उसने सोमनाथ मंदिर के नाम का भी वर्णन किया है। उसने यह भी बताया है कि यह मंदिर, समुद्र के स्थित है। यह बंदराग था,जहां चीन और जंज (पूर्वी अफ्रीका) के बीच यात्रा करने वाले जहाज ठहरते थे।  

कितना पुराना है सोमनाथ मंदिर?

यह मंदिर ईसा के जन्म से पहले ही अस्तित्व में था। मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने भी किया था। कुछ ऐतिहासिक ग्रंथों में जिक्र मिलता है कि सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने की कोशिश की थी। यह मंदिर, तब भी विश्व विख्यात मंदिरों से एक था। इतिहासकार बताते हैं कि गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया कराया था।

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सोमनाथ मंदिर।

 1000 साल में सोमनाथ मंदिर ने क्या-क्या देखा? आइए जानते हैं-

गजनवी ने जब सोमनाथ को लूटा, तोड़ा और नरसंहार किया

अल-बरूनी ने अपने यात्रा वृत्तांत तहकीक-ए-हिंद  में 1025-26 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण का विवरण दिया है। अल-बिरूनी ने ही लिखा है कि गजनवी ने मंदिर में शिव की प्रतिमा को तोड़ दिया था, वहां से सोना और जवाहरात लूटकर ले गया था। मोहम्मद गजनवी, गजनी का सुल्तान था। वह बेहद ताकतवर तुर्क शासक था, जो अपनी क्रूरता की वजह से कु्ख्यात रहा। उसने 17 बार भारत में आक्रमण किया। उसने सोमनाथ मंदिर को बार-बार लूटा। गजनवी का पहला आक्रमण 1025 इस्वी में हुआ था। यहां उसने सैकड़ों लोगों को मार दिया, संपत्ति लूटी और फरार हो गया। सोमनाथ मंदिर, उस वक्त तक, भारत के सबसे धनी मंदिरों में से एक था। गजनवी ने यहां से अपार सोना, चांदी और कीमती रत्न लूटे थे। उसने न केवल धन लूटा, बल्कि'शिवलिंग' को खंडित कर दिया। आक्रमण के दौरान हजारों निहत्थे पुजारियों और भक्तों का नरसंहार किया गया। मंदिर की रक्षा में जितने लोग आए, मारे गए। मध्यकालीन भारत में विदेशी आक्रमणकारियों की यह सबसे बर्बर घटना थी। 

राजा भीम ने बनवाया खंडित मंदिर

आक्रांता गजनवी के बाद यह मंदिर खंडहर में बदल गया था। अल-बरूनी ने लिखा है कि गजनवी ने इसके ऊपरी हिस्से को भी तोड़ने का आदेश दिया था। जब 1025-26 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आक्रमण किया, तब भीमदेव प्रथम गुजरात के शासक थे। कहा जाता है कि आक्रमण की खबर पाकर वह सीधे युद्ध के बजाय रणनीतिक रूप से कच्छ के कंठकोट किले में चले गए थे, ताकि बाद में शक्ति संगठित कर सकें। मंदिर की रक्षा के लिए हजारों भक्तों और स्थानीय योद्धाओं ने बलिदान दिया, लेकिन गजनवी मंदिर को लूटने और तोड़ने में सफल रहा। गजनवी के जाने के तुरंत बाद, राजा भीमदेव ने हार नहीं मानी। उन्होंने मालवा के राजा भोज के साथ मिलकर मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया। भीमदेव ने सोमनाथ मंदिर को पत्थरों से बनवायाथा। 

1297 में फिर टूटा सोमनाथ मंदिर

मुस्लिम आक्रांता, कभी नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर की स्वायत्तता बरकरार रहे। 1297 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलुग खान और नुसरत खान ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। गजनवी के आक्रमण के बाद यह सोमनाथ मंदिर पर दूसरा सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला माना जाता है। खिलजी की सेना ने गुजरात के तत्कालीन वाघेला राजा करण देव को जंग में हराया और मंदिर लूटपाट की। लुटेरों ने मंदिर की मूर्तियों को खंडित किया और वहां की संपदा लूट ली।

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सोमनाथ मंदिर। Photo Credit: PTI

 

 

राजा महिपाल देव ने जब फिर बनवाया सोमनाथ

इस हमले के बाद मंदिर का पुनरुद्धार जूनागढ़ के राजा महिपाल देव द्वारा करवाया गया था। सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पुनर्निर्माण की एक लंबी गाथा है, जिसमें गजनवी और खिलजी के अलावा बाद में औरंगजेब का नाम भी प्रमुखता से आता है।अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कुछ साल बाद सौराष्ट्र के राजा महिपाल देव प्रथम ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने 1308 ईस्वी के आसपास मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू करवाया। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद, उनके पुत्र राजा खंगार ने मंदिर में फिर से स्थापना कराई। 

जब औरंगजेब ने भी तुड़वाया सोमनाथ मंदिर

बात 1665 ईस्वी की है। औरंगजेब ने हिंदुस्तान की हुकुमत संभाली ही थी कि उसने पुराने हिंदू मंदिरों को तोड़ने का फरमान जारी कर दिया था। पहला हमला 1665 में हुआ, फिर 1706 ईस्वी में भी भीषण हमला हुआ। जीवन के अंतिम दिनों में उसकी सेना ने सोमनाथ मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। मिरात-ए-अहमदी में भी जिक्र आता है कि इस मंदिर को मस्जिद में बदलने की कोशिश हुई थी।  

औरंगजेब के विध्वंस के बाद दशकों तक खंडहर ही बना रहा सोमनाथ मंदिर। 

औरंगजेब के तुड़वाने के बाद किसने बनवाया था मंदिर?

सोमनाथ मंदिर 1706 ईस्वी में खंडहर में बदल गया था। मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्या बाई होल्कर को देश मंदिरों के जीर्णोद्धार कराने वाली शासिका के तौर पर याद करता है। उन्होंने 1783 में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने मुख्य खंडहर मंदिर के पास ही एक नया मंदिर बनवाया, जिसे अब 'पुराना सोमनाथ मंदिर' या 'अहिल्याबाई मंदिर' कहा जाता है। उन्होंने मंदिर को जमीन के नीचे बनवाया था जिससे, वह आक्रमणकारियों की सीधी नजर मंदिर पर न पड़े और पूजा बाधित न हो।

महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने अलग सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था।

आधुनिक सोमनाथ मंदिर किसने बनवाया है?

15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तो सोमनाथ मंदिर ने नया युग देखा। आधुनिक सोमनाथ मंदिर, सरदार वल्लभ भाई पटेल की देन है। उन्होंने 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ के भारत में विलय के बाद सोमनाथ के तट पर संकल्प लिया था कि मंदिर बनवाएंगे।  सोमनाथ मंदिर के लिए, 'सोमनाथ ट्रस्ट' बनवाया गया था। मंदिर बनवाने के लिए लोगों ने बढ़चढ़कर धन दिया था। सरदार पटेल के निधन के बाद, 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नए मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की। तब से लेकर अब तक, सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक विरासत बना है। हर महीने लाखों की संख्या में यहां लोग पहुंचते हैं।