प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दौरे के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के कई देशों के साथ संबंध है। किसके साथ कैसे रिश्ते रखना है। यह तय करना भारत का काम है। अराघची ने आगे यह भी कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

 

अब्बास अराघची ने कहा, 'भारत के कई देशों के साथ संबंध हैं। अपने संबंधों का फैसला करना भारत का काम है। हमारे लिए जो बात मायने रखती है, वह है हमारे और भारत के बीच मौजूद अच्छे संबंध... हम भारत के साथ अपने अच्छे संबंधों को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं।'

 

नई दिल्ली में अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने को तैयार है। मगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति अब बहुत जटिल हो गई है। पश्चिम एशिया संकट का बातचीत से हल निकालने के अलावा कोई और समाधान नहीं है।

 

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उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत कोई रचनात्मक भूमिका निभाता है तो ईरान उसका स्वागत करेगा। जब उनसे अमेरिका के साथ बाचतीत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बातचीत विश्वास की कमी से जूझ रही है। ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के हर कारण मौजूद हैं, जबकि अमेरिकियों के पास हम पर भरोसा करने के कई कारण मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली बातचीत अभी तक सफल नहीं हुई है।

 

 

 

भारत के साथ ईरान के अच्छे रिश्ते: अराघची

ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि हम भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत अहमियत देते हैं। ईरान और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। दोनों के संबंध हमेशा से बहुत अच्छे रहे हैं और हमने अपने सांस्कृतिक मूल्यों का आदान-प्रदान किया है। हमारे बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बहुत अच्छा रहा है। राजनीतिक संबंध और राजनीतिक परामर्श भी बहुत अच्छे रहे हैं। हम निश्चित तौर पर भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण और अच्छे संबंधों को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं, ताकि दोनों पक्षों को लाभ हो और ये संबंध आपसी हितों और आपसी सम्मान पर आधारित हों। 

 

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बातचीत के बीच दूसरी बार हुआ हमला

उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, मेरा देश एक आक्रामकता का शिकार हुआ है। अमेरिका और इजरायल ने अकारण आक्रामकता दिखाई। यह ठीक उस समय हुई जब हम अमेरिकियों के साथ बातचीत कर रहे थे। यह दूसरी बार है जब अमेरिका के साथ बातचीत के बीच में हम पर हमला किया गया। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। हम उन सभी देशों की सराहना करते हैं, जिन्होंने इस हमले की निंदा की।