रूसी कंपनियां, खासकर मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कंपनियां, भारतीय नागरिकों को रोजगार देने में रुचि दिखा रही हैं। रूस में भारतीय समुदाय के लोगों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। भारत से रूस जाने वालों में छात्र, पेशेवर और श्रमिक शामिल हैं। रूस में वह कई तरह की नौकरियों करते हैं। देश के कई राज्यों से युवा सुनहरे भविष्य की तलाश में रूस गए थे लेकिन अब उनकी लाशें भारत आ रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि रूस में उन्हें सैनिक बनाकर युद्ध में उतारा गया था।
हाल ही में हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक युवक का शव रूस से लाया गया। अंशु नाम का युवक पढ़ाई पूरी करने के लिए रूस गया था और अगस्त 2024 में वह रूस की सेना में शामिल हो गया था। 14 अक्टूबर 2025 को रूस में युद्ध के दौरान अंशु की मौत हो गई। अब छह महीने बाद अंशु का शव भारत लाया गया है। अंशु ने परिवार को बताया था कि वह वहां बुरी तरह फंस चुका है और इसके बाद उसका परिवार से संपर्क नहीं हो पाया।
13 युवाओं की मौत
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में उन युवाओं के बारे में बताया गया है जिनकी इस रूस में जान चली गई। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 13 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 9 युवक अकेले हरियाणा राज्य से थे। इसके अलावा पंजाब से 2 राजस्थान से 1 और जम्मू-कश्मीर का भी एक युवक शामिल है। इन में से ज्यादातर के शव मिल चुके हैं।
अभी भी कई युवा लापता
रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीयों में से 26 युवा अभी भी लापता हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा युवा हरियाणा के ही हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूसी सेना ने अगस्त 2024 में भारत के करीब 110 युवाओं को सेना में शामिल किया था। इनमें से 98 युवाओं को सरकार वापस लाई और 12 की युद्ध में मौत हो गई। सराकर ने भारतीय युवाओं के सेना में भर्ती पर रोक लगाने क एडवाइजरी जारी की लेकिन इसके बावजूद रूसी सेना में उन्हें भर्ती करवाया जा रहा है।
कैसे पहुंचे रूस?
जो युवा रूस की सेना में फंस चुके हैं उन सबकी अलग-अलग कहानी है। करनाल के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वह जर्मनी के लिए निकला था लेकिन एजेंट ने उसे रूस में ही रोक दिया। 2 दिन कहकर उसने दो महीने तक वहां रोके रखा। इसके बाद बेलारूस भेजने के नाम पर निकाला और बॉर्डर पर पुलिस ने पकड़ लिया। आंखों पर पट्टी बांधकर 10 दिन तक जेल में रखा। 10 दिन बाद धमकी देकर आर्मी में भर्ती का कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया। इसके बाद रूस के कब्जे वाली जमीन पर हथियारों के साथ भेज दिया। हर्ष की एक वीडियो वायरल हुई जिसके बाद उसके परिजन विदेश मंत्री से मिे और फइर 30 सितंबर 2025 को वह घर लौट आया। हालांकि, कई ऐसे भी युवा हैं जो युद्ध से घर नहीं लौट पाए और कुछ की तो लाशें भी नहीं स्वदेश नहीं आई।
जिन युवाओं को आर्मी में भर्ती किया गया है उनमें ज्यादातर ऐसे युवा हैं जो पढ़ाई के लिए रूस गए थे लेकिन किसी कारण से उन्हें वहीं रहना पड़ा। हरियाणा का सोनू पढ़ाई के लिए स्टडी वीजा पर गया था। जब वीजा खत्म हुआ तो वह सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करने लगा ताकि वीजा का टाइम बढ़ जाए। बाद में उसे पता चला की सिक्योरिटी गार्ड कहकर उसे आर्मी में भर्ती कर लिया। इसके बाद उसका शव ही भारत आया है। ऐसी ही कहानियां कई और युवाओं की भी हैं जो रूस युद्ध में फंसे हुए हैं।
