देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है और CBI ने अब इस मामले में एक बड़ी गिरफ्तारी कर लिया है। CBI ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने पेपर लीक के इस मामले में एक रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है जिसे इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। हैरानी की बात है कि यह आरोपी प्रोफेसर इस परीक्षा को करवाने वाली एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की उस टीम का हिस्सा था जो पेपर तैयार करती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान पी.वी. कुलकर्णी के रूप में हुई है। CBI के मुताबिक कुलकर्णी कई सालों तक मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीमों से जुड़े रहे। इसी दौरान उन्होंने परीक्षा पैटर्न, सीक्रेट डॉक्यूमेंट और सुरक्षा प्रक्रिया के बारे में सब कुछ जान लिया। CBI का आरोप है कि इसी पहुंच और अनुभव का इस्तेमाल कर उन्होंने करोड़ों रुपये का पेपर लीक रैकेट खड़ा कर दिया।
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बच्चों तक कैसे पहुंचता था पेपर?
जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी ने बेहद सुनियोजित तरीके से छात्रों तक पेपर पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया था। CBI का आरोप है कि परीक्षा से पहले कुछ चुनिंदा छात्रों को स्पेशल क्लास के नाम पर बुलाया जाता था। इन क्लासों में कथित तौर पर वही सवाल और जवाब बताए गए जो बाद में असली नीट परीक्षा में पूछे गए। छात्र उन सवालों को अपनी नोटबुक में लिखते थे और बाद में जांच एजेंसियों ने जब उन नोट्स का असली पेपर से मिलान किया तो कई सवाल हूबहू एक जैसे पाए गए।
CBI के अनुसार, यह पूरा खेल सिर्फ कुछ छात्रों तक सीमित नहीं था। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में छात्रों को फायदा पहुंचाया गया और इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। एजेंसी को शक है कि एक छात्र से 10 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक लिए गए। कई बच्चों के घर वालों ने कथित तौर पर अपने बच्चों के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए भारी रकम चुकाई।
प्रोफेसर पर गंभीर आरोप
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुलकर्णी पर सिर्फ पेपर लीक का नहीं बल्कि पूरे रैकेट को ऑपरेट करने का आरोप है। CBI का मानना है कि वही इस नेटवर्क का मास्टपमाइंड था। उसने बिचौलियों, कोचिंग से जुड़े लोगों और कुछ अन्य लोगों की मदद से ऐसा सिस्टम बनाया था जिसमें पेपर लीक होने के बाद सवाल चुनिंदा छात्रों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने पुणे स्थित अपने घर और कुछ प्राइवेट जगहों पर गुप्त सेशन आयोजित किए। इन सेशनों में छात्रों को मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होती थी। छात्रों को हाथ से नोट्स बनाने के लिए कहा जाता था ताकि डिजिटल सबूत कम से कम रहें। हालांकि, जांच एजेंसियों को छात्रों की नोटबुक और अन्य दस्तावेजों से कई अहम सुराग मिले हैं। यह सबूत इस मामले में अहम साबित हो सकते हैं।
जांच में जुटी CBI
CBI अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से एक्टिव हो सकता है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कुलकर्णी पहले भी किसी अन्य परीक्षा में इसी तरह की भूमिका निभा चुका है। जांच टीम को शक है कि इस रैकेट के तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। अब एजेंसी मनी ट्रेल के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
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अब 21 जून को होगी परीक्षा
NEET परीक्षा देशभर के लाखों छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा के बाद पेपर लीक होने पर छात्रों में काफी ज्यादा गुस्सा है। हालांकि, अब NTA ने नीट के लिए नई तारीख की घोषणा कर दी है। अब 21 जून को यह परीक्षा होगी।
