वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने 1 फरवरी को देश का आम बजट 2026-27 संसद में पेश किया। उन्होंने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और देश में निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई बड़े एलान किए। सत्तारुढ़ बीजेपी ने इस बजट को 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए संकल्प-पत्र करार देते हुए इसे भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के नजरिये से पेश किया गया बजट बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्रीय बजट 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को दर्शाता है और सुधारों की यात्रा को सुदृढ़ करता है। साथ ही विकसित भारत के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार करता है।

 

दूसरी तरफ विपक्ष ने बजट को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में भारत के सामने मौजूद वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'युवाओं के पास नौकरी नहीं है, विनिर्माण गिर रहा है, निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत घट रही है, किसान संकट में हैं, आसन्न वैश्विक झटके, सभी को नजरअंदाज कर दिया गया।' उन्होंने दावा किया कि यह एक ऐसा बजट जिसमें चीजों को ठीक करने के बजाय वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई।

 

 

बजट से क्या उम्मीद होगी?

केंद्रीय बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जब बीजेपी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या उम्मीद होगी?

 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम।' उन्होंने कहा, 'हमने तो पहले ही कहा था - सवाल ये नहीं है कि शेयर बाजार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा।' उन्होंने कहा, 'जब बीजेपी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी। हम तो बीजेपी के हर बजट को 1/20 का बजट मानते हैं क्योंकि वो पांच प्रतिशत लोगों के लिए होता है।'

 

 

 

अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का बजट

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का बजट होता है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार का अदृश्य खाता-बही होता है।' उन्होंने दावा किया कि इस बजट में न आम जनता का जिक्र है, न फिक्र और महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को कर में छूट न देना, 'टैक्स-शोषण' है।

 

उन्होंने दावा किया, 'अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है। यह निराशाजनक, निंदनीय बजट है।'

बजट दिशाहीन, दूरदर्शिता का अभाव- ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 2026-27 का केंद्रीय बजट दिशाहीन, जनविरोधी है और इसमें दूरदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि बजट में पश्चिम बंगाल के लिए कुछ भी नहीं है। बनर्जी ने दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि बजट में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है।

 

उन्होंने आरोप लगाया, 'यह बजट दिशाहीन है, इसमें दूरदर्शिता का अभाव है तथा यह नीरस एवं जनविरोधी है। यह बजट महिला-विरोधी, किसान-विरोधी, शिक्षा-विरोधी है तथा यह अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के भी खिलाफ है...। बजट में पश्चिम बंगाल के लिए कुछ भी नहीं है।

पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़

बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा, जो चालू वित्त वर्ष के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने साथ ही देश में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की।