प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 अप्रैल को हरदोई में एक प्रोग्राम के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत करेंगे। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है। सरकार इस सड़क को सिर्फ गाड़ियां चलाने के लिए ही नहीं, बल्कि काम-धंधे और फैक्ट्रियों के एक बड़े सेंटर के तौर पर बना रही है। इसका मतलब है कि सड़क के किनारे-किनारे ऐसी जगहें बनाई जा रही हैं, जहां बहुत सारी फैक्ट्रियां लग सकेंगी।

 

सरकार ने इस सड़क को इस तरह से प्लान किया है ताकि यहां व्यापार करना आसान हो। यहां ऐसे इलाके विकसित किए जा रहे हैं, जहां कंपनियां अपनी फैक्ट्री लगा सकें, अपना सामान रखने के लिए बड़े गोदाम बना सकें और तैयार माल को ट्रकों में भरकर भेजने के लिए गाड़ियों की सुविधा पा सकें। ये तीनों चीजें एक ही जगह मिलने से कंपनियों को बहुत फायदा होगा।

 

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किनारे बनेंगे 12 बिजनेस सेंटर

यह एक्सप्रेसवे लगभग 594 किलोमीटर लंबा है। इसके किनारे 12 अलग-अलग जिलों में 12 बड़े बिजनेस सेंट बनाए जा रहे हैं। इन सेंटर्स के लिए सरकार ने 6,507 एकड़ जमीन भी चुन ली है। अधिकारियों ने बताया कि हर सेंटर को वहां के हिसाब से इस तरह बनाया जा रहा है ताकि सामान बनाने और उसे बाहर भेजने का काम बिना किसी रुकावट के हो सके।

बिजनेस का नया नेटवर्क

इस एक्सप्रेसवे के किनारे अपना काम शुरू करने के लिए अब तक 987 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। सरकार को उम्मीद है कि इन कंपनियों के आने से इलाके में करीब 47,000 करोड़ रुपये का पैसा लगेगा। जब इतनी सारी कंपनियां यहां आएंगी, तो 12 जिलों में बिजनेस का एक नया जाल बिछ जाएगा और वहां के रहने वाले लोगों को नौकरी और कमाई के नए मौके मिलेंगे।

 

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पिछड़े जिलों के बदलेगी हालात

यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों को आपस में सीधे जोड़ देगा, जिससे इन इलाकों में पिछड़ापन दूर होगा। अधिकारियों का मानना है कि हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में फैक्ट्रियां लगने से वहां बहुत तरक्की होगी। इस पूरी योजना का असली मकसद एक्सप्रेसवे के आसपास के पूरे इलाके को पैसों के मामले में बहुत मजबूत और खुशहाल बनाना है।