पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हालिया यात्रा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से इस कार्यक्रम के दौरान हुई कथित कमियों पर रिपोर्ट मांगी है। केंद्र के गृह गोविंद मोहन ने चार मुख्य बातों पर सवाल उठाए हैं। पहला उन्होंने पूछा है कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई करने क्यों नहीं पहुंचे? दूसरा राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी क्यों नहीं था। तीसरा प्रशासन द्वारा चुना गया रास्ता कचरे से क्यों भरा हुआ था और चौथा इसके लिए दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जिम्मेदार हैं तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

 

गृह सचिव ने शाम 5 बजे तक जवाब मांगा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति मुर्मू सिलीगुड़ी के पास 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में गईं। कार्यक्रम में कई कमियां दिखीं। राष्ट्रपति ने खुद नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जब राष्ट्रपति आती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्री स्वागत करते हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।

 

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ममता को बताया था छोटी बहन

राष्ट्रपति ने कहा था, 'ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। शायद वे नाराज हैं इसलिए जगह बदली गई लेकिन कोई बात नहीं, आप सब अच्छे रहें।' उन्होंने कार्यक्रम की जगह बदलने और कम लोगों के आने पर भी सवाल उठाए। राष्ट्रपति ने कहा कि राज्य सरकार शायद आदिवासियों का भला नहीं चाहती, इसलिए उन्हें आने से रोका गया।

 

 

 

ममता ने दिया जवाब

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन इंटरनेशनल संथाल काउंसिल ने बुलाया था। जिला प्रशासन ने पहले ही आयोजकों की तैयारी कम होने की बात राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित और फोन पर बताई थी। फिर भी कार्यक्रम हुआ।

 

ममता बनर्जी ने कहा, 'राष्ट्रपति का सिलीगुड़ी के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और पुलिस कमिश्नर ने स्वागत किया, जैसा राष्ट्रपति सचिवालय की लाइनअप में था। मुख्यमंत्री उस लाइनअप में नहीं थीं। कोई प्रोटोकॉल चूक नहीं हुई। बीजेपी राष्ट्रपति पद का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।'

पीएम ने बताया शर्मनाक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि लोकतंत्र और आदिवासियों के सशक्तीकरण में विश्वास रखने वाले सब दुखी हैं। राष्ट्रपति जी, जो खुद आदिवासी समुदाय से हैं, उनके दर्द ने पूरे देश को दुखी किया है। टीएमसी सरकार ने हद पार कर दी है।

 

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बंगाल में कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। टीएमसी और बीजेपी एक-दूसरे पर हमलावर हो रही है। टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने भी पीएम मोदी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल के लोग बनाम बीजेपी + चुनाव आयोग + ईडी + आईटी + सीबीआई + एनआईए + सीएपीएफ + राज्यपाल + 20 केंद्रीय मंत्री + 10 मुख्यमंत्री + प्रधानमंत्री + राष्ट्रपति जी + गोदी मीडिया। जब पूरा सिस्टम बंगाल के खिलाफ खड़ा है, तो बंगाल और मजबूत होता है।'