सुनहरे भविष्य और बेहतर कमाई की तलाश में खाड़ी देशों का रुख करने वाले हजारों भारतीयों के लिए परदेस की राह आसान साबित नहीं हो रही है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों में इस समय कुल 5,548 भारतीय सलाखों के पीछे हैं। इनमें विचाराधीन कैदी और सजा काट रहे अपराधी दोनों शामिल हैं। यह स्थिति उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बिना पूरी जानकारी और कानूनी समझ के विदेश चले जाते हैं।

 

दरअसल, यह आंकड़े तब सामने आए जब कैराना लोकसभा क्षेत्र से सांसद इकरा चौधरी ने विदेश मंत्रालय से उन युवाओं के बारे में सवाल पूछे जो उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों में काम करने गए थे। विशेष रूप से उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन युवाओं के संबंध में सवाल उठाए जो इस समय खाड़ी देशों की जेलों में फंसे हुए हैं।

 

इन सवालों का जवाब 13 मार्च को दिया गया। हालांकि, अपने जवाब में मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के कैदियों के बारे में विशेष रूप से जानकारी देने के बजाय भारतीय कैदियों के आंकड़े पेश किए।

 

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सऊदी अरब में सबसे ज्यादा भारतीय कैदी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में भारतीय कैदियों की सबसे ज्यादा संख्या सऊदी अरब में दर्ज की गई है। यहां 2,478 भारतीय जेलों में बंद हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 1,419, कतर में 870, कुवैत में 379, बहरीन में 303 और ओमान में 99 भारतीय कैदी दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2025 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं।

क्या हैं इनके अपराध?

दस्तावेज में यह नहीं बताया गया कि ये कैदी किस-किस अपराध के कारण जेल में हैं। इसमें सिर्फ यह कहा गया है कि ये विचारणाधीन और दोषसिद्ध दोनों तरह के कैदी हैं। कुछ मामलों में भर्ती एजेंटों की धोखाधड़ी और मादक पदार्थ से जुड़े आरोप का जिक्र उदाहरण के तौर पर किया गया है। हालांकि, ऐसे कई अपराध हैं जिनके बारे में इन भारतीय कैदियों के संदर्भ में अक्सर सुनने को मिलता है।

 

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खाड़ी देशों में भारतीयों के जेल जाने के पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनमें सबसे आम वजह वीजा और रेजिडेंसी नियमों का उल्लंघन है। कई लोग टूरिस्ट वीजा पर जाकर वहीं नौकरी तलाशने लगते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी देश में रह जाते हैं, जो वहां गंभीर अपराध माना जाता है।

 

इसके अलावा ड्रग्स और शराब से जुड़े अपराध भी बड़ी वजह हैं। खासकर सऊदी अरब में शराब का सेवन, निर्माण या बिक्री सख्त रूप से प्रतिबंधित है और नशीले पदार्थों के मामलों में बेहद कड़ी सजा का प्रावधान है।

 

इसके अलावा, कई लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने, बिना परमिट के सामान बेचने या कर्ज न चुका पाने जैसे अपराधों के कारण जेल पहुंच जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, कई भारतीय जो फर्जी एजेंटों की चाल में फंसकर विदेश जाते हैं, बाद में वे कानूनी पचड़ों में उलझ जाते हैं और अंततः उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ती है।