देश में स्कॉलरशिप योजना में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 5 राज्यों के सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। आरोप है कि छात्रों के लिए बनाई गई स्कॉलरशिप योजना के पैसे को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निकाला गया है। इसमें कई राज्यों के अधिकारी शामिल हैं। इसके साथ ही कई संस्थानों का भी इस घोटाले में हाथ हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह 11 करोड़ से ज्यादा रकम का घोटाला है। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला केंद्र सरकार की उस योजना से जुड़ा है, जिसका मकसद दिव्यांग छात्रों को आर्थिक मदद देना था। जांच में सामने आया कि फर्जी छात्रों और नकली संस्थानों के नाम पर स्कॉलरशिप का पैसा अधिकारियों ने निकाला लिया है। जिन छात्रों के लिए यह योजना बनाई गई थी उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। CBI ने शुरुआती जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। 

 

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11 करोड़ से ज्यादा का घोटाला

CBI के अनुसार, इस मामले में करीब 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को गलत तरीके से अधिकारियों ने निकाला है। आरोप है कि 2023 से 2024 के बीच यह घोटाला हुआ, जिसमें फर्जी लाभार्थियों को दिखाकर सरकारी पैसे को गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया।

 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले में 900 से ज्यादा फर्जी क्लेम सामने आए हैं। जांच एजेंसी को कई शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी शक है। इसके अलावा जांच में सामने आया है कि कई ऐसे संस्थानों के बच्चों को भी स्कॉलरशिप दी गई है जो सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थे। वास्तव में उन नामों के कोई संस्थान ही नहीं हैं। 

किन राज्यों में हुआ घोटाला?

इस घोटाले में चार राज्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। CBI की FIR में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के सरकारी अधिकारियों और नोडल अफसरों को आरोपी बनाया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने स्कॉलरशिप के फर्जी आवेदन पास करने में मदद की और नियमों का उल्लंघन किया। CBI को जांच में पता चला है कि नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर कई ऐसे संस्थान और छात्र दर्ज थे, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं थे। करीब 100 संस्थानों की जांच में 18 संस्थान पूरी तरह फर्जी पाए गए।

 

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समझिए कैसे किया घोटाला

इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्कॉलरशिप के लिए अधिकारियों ने फर्जी छात्रों के नाम पर गलत जानकारी से आवेदन किए। इसके बाद उन फर्जी छात्रों के बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। कई छात्र ऐसे थे जो इस स्कॉलरशिप के लिए एलिजिबल ही नहीं थे और उन्हें भी स्कॉलरशिप मिल गई। उनके आवेदन को वेरिफाई करने में कई अधिकारियों का हाथ है।