ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के मारे जाने के बाद जम्म-कश्मीर में जोरदार प्रदर्शन हुए। कई बार पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा और अब स्थिति को देखते हुए स्कूलों को बंद कर दिया गया है। ईरान पर हुए हमले और आयतुल्लाह खामेनेई के मारे जान पर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल पूछने वाले श्रीनगर के सांसद आगा सैय्यद रूहुल्लाह मेहदी और श्रीनगर के पूर्व जुनैद अजीम मट्टू चर्चा में आ गए हैं। इन दोनों की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पुलिस ने दोनों के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया है। दोनों ने आरोप लगाए थे कि खामेनेई के मामले में सवाल पूछने की वजह से उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई। अब रूहुल्लाह मेहदी ने लिखा है कि जनता ने उन्हें सवाल पूछने के लिए चुना है कि सरकार की अनुमति से लिखा गया शोक संदेश पढ़ने के लिए नहीं।

 

FIR दर्ज करने वाली पुलिस ने अपने बयान में कहा है, 'प्रथम दृष्टया, विचाराधीन सामग्री अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार को दर्शाती है, जो सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव बिगड़ने का कारण बन सकती है। गलत सूचना फैलाने के इस तरह के जानबूझकर किए गए प्रयास शांति, सुरक्षा और समग्र स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।’ पुलिस ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किये गए हैं और जांच शुरू कर दी गई है।

 

यह कार्रवाई श्रीनगर से लोकसभा सदस्य मेहदी के उस दावे के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके सुरक्षा घेरे में कमी कर दी गई है। श्रीनगर शहर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू ने भी दावा किया था कि ईरान पर अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत पर उनके बयानों के कारण उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई। मट्टू ने दावा किया कि इस कदम का उद्देश्य उन्हें चुप कराना है।

 

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क्या बोले रूहुल्ला मेहदी?

 

FIR होने के बाद रूहुल्ला मेहीद ने लिखा है, 'श्रीनगर पुलिस ने मेरे खिलाफ साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की है और उनका कहना है कि मैं फर्जी बातें फैला रहा हूं। इसी प्रशासन को यह हिम्मत नहीं हुई कि एक संप्रभु देश के नेता के मारे जाने की निंदा कर सके। अब इन्होंने उस एक आदमी को ढूंढ लिया जिसने उसकी निंदा की। श्रीनगर के लोगों ने अपना सांसद इसलिए नहीं चुना है कि वह सरकार की सहमति से लिखे गए शोक संदेश पढ़े। लोगों ने मुझे सच बोलने के लिए चुना है और उनका समर्थन इस FIR से खत्म नहीं हो जाता है।'

इससे पहले आगा सैय्यद रूहुल्ला मेहदी ने अपने X हैंडल पर लिखा था, 'जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन के कुछ मूर्खों को लगता है कि सुरक्षा वापस लेकर या घटाकर और मेरा फेसुबक अकाउंट सस्पेंड करके वे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने से मुझे रोक लेंगे। यह हास्यास्पद है। ना तो मुझे ऐसी चीजें आकर्षित करती हैं और ना ही मैं इनके न हो से डरता हूं। मेरे पिता लोगों के लिए खड़े होने की वजह से शहीद हो गए थे। यही चीज मुझे आकर्षित करती है और यही मेरा काम है। देश के नागरिक के तौर पर मैं तब तक अपने अधिकारों का इस्तेमाल करूंगा और अत्याचार और कानून के उल्लंघन के खिलाफ बोलूंगा, जब तक कि मेरे शरीर में खून की एक बूंद भी रहेगी। जो कुछ भी आपने थोड़ा बहुत यहां छोड़ा है, सब ले लीजिए। ये मूर्खतापूर्ण काम मुझे नहीं रोक पाएंगे।'

 

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बता दें कि आयतुल्लाह खामेनेई के मारे जाने को लेकर भारत सरकार की ओर से कोई भी बयान जारी नहीं किया गया है। इसी को लेकर कई विपक्षी नेता और दल सवाल उठा रहे हैं।