लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर परिवार में कलह को लेकर सोशल मीडिया पर अपना दर्ज साझा किया है। शनिवार को उन्होंने एक भावुक पोस्ट लिखा और इशारों-इशारो में यह जता दिया कि तेजस्वी यादव की वजह से उनकी पार्टी बिखर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी विरासत को कोई और नहीं, अपने ही तबाह कर देते हैं।

रोहिणी आचार्य ने कहा है कि जब विवेक पर पर्दा पड़ता है और अहंकार सिर पर चढ़ता है तब विनाश तय होती है। उन्होंने एक बार फिर 'जयचंद' के बहाने परिवार पर तंज कस दिया है। उन्होंने कहा है कि लोग बहकावे में आकर खुद को मिटाने पर ही आमदा हो जाते हैं।

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रोहिणी आचार्य:-
बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई 'बड़ी विरासत' को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी नए बने अपने ही काफी होते हैं।

रोहिणी आचार्य ने कहा, 'हैरानी तो तब होती है , जब जिसकी वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर अपने ही आमादा हो जाते हैं।'

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रोहिणी आचार्य:-
जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब विनाशक ही आंख, नाक और कान बन बुद्धि विवेक हर लेता है।

रोहिणी, तेजस्वी से नाराज क्यों हैं?

तेजस्वी यादव का अपने दोस्त संजय यादव के करीब होना, परिवार के कई लोगों को खटक रहा है। तेज प्रताप यादव को घर से निकालने में संजय यादव का नाम सामने आया था। अभी लालू परिवार के बिखवार की सबसे बड़ी वजह तेजस्वी यादव के करीबी राज्यसभा सांसद संजय यादव और उनके दोस्त रमीज नेमत खान हैं। 

रोहिणी का कहना है कि संजय यादव ने पार्टी को हाइजैक किया है। सितंबर 2025 में रोहिणी ने संजय की आलोचना की थी, जब वह तेजस्वी की बस में 'फ्रंट सीट' पर बैठे दिखे थे। रोहिणी ने कहा था कि संजय को सांसद या विधायक बना दो, लेकिन नेता की कुर्सी पर तो न बिठाओ।  

रोहिणी आचार्य ने नवंबर 2025 में आरोप लगाया था कि संजय यादव और रमीज का नाम लेने पर उन्होंने घर से निकाल दिया गया है, चप्पल से मारने की कोशिश हुई और बदनाम किया गया। रोहिणी, अब पटना में लालू यादव के साथ नहीं रह रही हैं। वह दिल्ली और सिंगापुर आती-जाती रही हैं।