देशभर के करीब 30 करोड़ मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने आज यानी 12 फरवरी को भारत बंद बुलाया है। AITUC का कहना है कि इस बार का आंदोलन अपने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ेगी। पिछली बार जुलाई 2025 में करीब 25 करोड़ लोग आंदोलन में शामिल हुए थे लेकिन शायद इस बार यह आंकड़ा और बड़ा होने की उम्मीद है। 


ऐसा माना जा रहा है कि इस बंद का असर करीब 600 से ज्यादा जिलों में देखने को मिल सकता है। किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और छात्रों ने भी इस हड़ताल को अपना पूरा समर्थन दिया है। 

 

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क्यों बुलाया गया है बंद?

यूनियन का आरोप है कि सरकार की नीतियां मजदूर और किसान विरोधी है। सरकार केवल बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचा रही है। SKM और खेती से जुड़े अन्य मजदूर संगठनों के मनरेगा को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर एकजुट होने की संभावना है।

AITUC की महासचिव अमरजीत कौर ने मीडिया को बताया कि इस बार हड़ताल में पिछली बार से ज्यादा लोगो के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, '12 फरवरी को होने वाली हड़ताल में कम से कम 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं। 9 जुलाई 2025 को हुए विरोध प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ मजदूर शामिल हुए थे।'

अमरजीत कौर ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में भी इस हड़ताल का बड़ा असर दिख सकता है। उनके अनुसार, ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रह सकते हैं और अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेंगे।

आज क्या-क्या बंद रह सकता है?

  • बैंक और इंश्योरेंस: सरकारी बैंकों और इंश्योरेंस दफ्तरों में कामकाज ठप रह सकता है।
  • बस और ट्रांसपोर्ट: कुछ राज्यों में सरकारी बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
  • सरकारी दफ्तर: केंद्र और राज्य सरकार के कई विभागों में काम रुक सकता है।
  • फैक्ट्रियां: कोयला, स्टील और बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है।

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किन सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर?

आम जनता की सहूलियत के लिए कुछ जरूरी सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है। जैसे- 

  • अस्पताल, एम्बुलेंस और दवा की दुकानें खुली रहेंगी।
  • दूध और खाने-पीने की जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रहेगी।
  • मेट्रो सेवाएं और ज्यादातर निजी दफ्तर सामान्य रूप से काम कर सकते हैं।
  • स्कूल और कॉलेज खुले रहेंगे या नहीं, इसका फैसला स्थानीय प्रशासन पर छोड़ा गया है।
  • सरकारी विभागों, पब्लिक सेक्टर कंपनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और निजी संस्थानों में हड़ताल के नोटिस दिए जा चुके हैं। गांव और शहर दोनों जगह जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान चलाए गए हैं।