भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश में संविधान लागू और पूरी तरह से गणतांत्रिक देश बनने की तारीख 26 जनवरी 1950 थी और अब 76 साल बीत चुके हैं। इस मौके पर राजधानी नई दिल्ली में शानदार परेड आयोजित की गई है जिसकी सलामी भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लेंगी। इस ऐतिहासिक मौके पर देश के इतिहास और खासकर स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद के इतिहास को याद किया जा रहा है। ऐसे में देश के पंडित जवाहर लाल नेहरू और आखिरी वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन को भी याद किया जाना तो बनता है। 

 

1947 में देश को आजादी मिलने के बाद संविधान निर्माण में लगभग 3 साल का वक्त लगा था। इसी वक्त के पूरा होने के बाद तय हुआ कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होगा। संविधान लागू तो पहली बार 26 जनवरी 1950 को एक परेड भी हुई थी और यह परंपरा उसी वक्त से शुरू हुई थी। इसी परेड को लेकर पंडित नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन को एक चिट्ठी लिखी थी। आइए पढ़ते हैं वह चिट्ठी...


पंडित नेहरू ने क्या लिखा?

 

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू उस वक्त लॉर्ड माउंटबेन के बेहद करीब थी। पंडित नेहरू अपने औपचारिक पत्रों में भी कई लोगों को उनके असली नाम की जगह बुलाने वाले नाम का इस्तेमाल करते थे। इसी तरह जब वह लॉर्ड माउंटबेटन को चिट्ठी लिखते हैं तो उन्हें 'डियर डिकी' कहकर संबोधित करते हैं। लॉर्ड माउंटबेटन को उनके करीबी लोग डिकी कहकर बुलाते थे। जब भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया तब तक लॉर्ड माउंटबेटन अपने देश लौट चुके थे।

 

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जब देश ने पहला गणतंत्र दिवस मनाया तो इसकी जानकारी देने के लिए पंडित नेहरू ने माउंटबेटन को एक चिट्ठी लिखी। गणतंत्र दिवस के बाद 29 जनवरी 1950 को लिखी चिट्ठी में पंडित नेहरू लिखते हैं, 'मेरे प्रिय डिकी, यहां हमारा यह हफ्ता जोरदार रहा और गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत के साथ ही कई कार्यक्रम हुए। राष्ट्रपति सोएकार्नो (इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति) और उनकी पत्नी भी यहां कुछ दिन के लिए आए और उनके ठीक पहले कॉमनवेल्थ के कई मंत्री भी आए। इसका नतीजा हुआ कि मुझे बहुत थकान हो गई है और अब आराम की जरूरत है लेकिन आराम का मौका है नहीं।'

 

गणतंत्र दिवस के बारे में माउंटबेटन को बताते हुए पंडित नेहरू लिखते हैं, 'हमने जो बहुत सारे कार्यक्रम किए वे शानदार ढंग से आयोजित किए गए थे और उन्हें गजब की कामयाबी भी मिली। 26 जनवरी को हुई परेड भी अपने आप में शानदार थी और वहां मौजूद हर किसी को इसने प्रभावित किया। इस बार हमने इसका आयोजन स्टेडियम में किया और सब कुछ घड़ी के हिसाब से एकदम सही हुआ। दिल्ली में भारी भीड़ इकट्ठा हुई और लोगों में खूब जोश था। हालांकि, हमने पहले से जो इंतजाम किए थे, उनके चलते लोगों को मुख्य कार्यक्रम से दूर रखा था। इतने लोगों को स्टेडियम में लाना असंभव था।'

 

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वह आगे लिखते हैं, 'राष्ट्रपति का काफिला कुछ भीड़भाड़ वाली सड़कों से गया लेकिन इसमें सिर्फ राष्ट्रपति की गाड़ी और उनके बॉडीगार्ड ही थे। इसके चलते कुछ लोग निराश भी हुए। हमने प्रस्ताव रखा है कि अगले हफ्ते होने वाले म्युनिसिपिल फंक्शन के लिए एक जुलूस निकाला जाएगा और यह टाउन हॉल के लिए यह जुलुस पुराने शहर में जाएगा। इससे लोगों को मौका मिलेगा और वे इसे पास से देख पाएंगे।'

याद आ गई देश की आजादी

 

इस मौके पर वह देश की आजादी के मौके को याद करते हुए लिखते हैं, 'मुझे साफ-साफ याद है कि 15 अगस्त 1947 को क्या हुआ था। उस समय के इंतजाम अच्छे नहीं थे और उतनी भीड़ से हम सब आश्चर्यचकित हो गए थे। शायद अंतिम विश्लेषण इस तरह से करना सही होगा कि इस बार हम बेहतर इंतजाम इंतजाम कर पाए। सोएकार्नो और उनकी पत्नी ने भारत में 4 दिन बिताए और हर किसी को प्रभावित किया। वे शानदार कपल हैं।'