NEET UG पेपर लीक केस के आरोपियों की तलाश में CBI अलग-अलग राज्यों में दस्तक दे रही है। इस केस में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े कई लोगों के चेहरे बेनकाब हुए हैं। CBI ने पुणे की मनीषा वाघमारे, रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और जीव विज्ञान की लेक्चरर मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया है।
CBI का कहना है कि इन आरोपियों ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में कुछ छात्रों को अपने घर पर अलग कोचिंग दी। उन्होंने लीक हुए प्रश्न और उनके जवाब छात्रों को लिखवाए और इसके बदले में लाखों रुपये लिए। 3 मई को हुई परीक्षा में ठीक, यही प्रश्न आए। पेपर लीक के खुलासे के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई है।
CBI इस मामले की जांच में तेजी लाते हुए देशभर में छह अलग-अलग जगहों पर छापेमारी भी कर चुकी है। NEET पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के कोचिंग और प्रोफेसर्स का नेटवर्क कहां तक फैला है, कौन-कौन पकड़ा गया है, आइए जानते हैं-
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पीवी कुलकर्णी, केमेस्ट्री प्रोफेसर, जिसने लीक किया पेपर
पीवी कुलकर्णी, लातूर से आता है। वह केमेस्ट्री का रिटार्यड प्रोफेसर है। NEET पेपर लीक की मुख्य आरोपी मानी जा रहा है। 30 साल से NTA से वह जुड़ा था। NEET UG 2026 का केमिस्ट्री पेपर लीक करने में उसकी मुख्य भूमिका है। पीवी कुलकर्णी लातूर के दयानंद कॉलेज में करीब 28 साल केमिस्ट्री पढ़ाई। चार साल पहले रिटायर होने के बाद वह NEET और CET की तैयारी करने वाले छात्रों को गाइडेंस देता था। उसी के बंगले ऊपर 15-16 छात्र रहते थे। स्टूडेंट आते-जाते रहते थे।
CBI ने बताया है कि परीक्षा से ठीक पहले कुलकर्णी ने एक प्राइवेट गाइडेंस सेशन में कुछ सवाल और उनके जवाब छात्रों को लिखाए। बाद में जब CBI ने छात्रों के नोटबुक जब्त किए तो उनमें लिखे सवाल असली NEET पेपर से मैच कर गए। रिटायरमेंट के बाद भी कुलकर्णी NTA के सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट के रूप में काम करते थे और NEET पेपर बनाने में मदद करते थे।
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प्रोफेसर मनीषा मंधारे, जिस पर भरोसा था, उसी ने बांट दिए पेपर
बायोलॉजी पेपर लीक करने में पुणे की प्रोफेसर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। CBI का कहना है कि मनीषा NTA से जुड़ी थी उसके पास बॉटनी और जूलॉजी के पेपर आए थे। दिल्ली में पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।वह शिवाजीनगर के मॉडर्न कॉलेज में सीनियर बॉटनी की टीचर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि उन्होंने पिछले 5-6 साल से NEET प्रश्नपत्र बनाने में मदद की थी। अप्रैल 2026 में उन्होंने मनीषा वाघमारे के जरिए संभावित छात्रों को पहचाना। अपने पुणे घर पर स्पेशल कोचिंग चलाई। इन क्लासेस में छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्न लिखवाए गए, जो बाद में असली NEET पेपर से मैच कर गए।
ब्यूटी पॉर्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे कैसे NEET रैकेट का हिस्सा बनी?
NEET पेपर लीक मामले में पुणे पुलिस ने मनीषा वाघमारे भी गिरफ्तार हुई है। वह बिबवेवाडी की रहने वाली है। उसने अपने ब्यूटी पार्लर के जरिए छात्रों और उनके माता-पिता से संपर्क करती थी। वह मेडिकल में एडमिशन चाहने वाले छात्रों को मुख्य आरोपी धनंजय लोखंडे तक पहुंचाती थी। पैसे लेकर उन्हें पेपर लीक रैकेट में फंसाती थी। पुलिस ने उसका मोबाइल, लैपटॉप जब्त किया है। परीक्षा के समय उसके बैंक अकाउंट में भारी लेन-देन की साजिश सामने आई है।
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कौन है धनंजय लोखंडे?
धनंजय लोखंडे, मंगलुरु में पढ़ाई कर चुका है। वह पुणे में प्रैक्टिस कर चुका है। अब NEET केस में वह रडार पर आया है। CBI की गिरफ्त में है। वह महाडूक सेंटर का रहनेवाला है। धनंजय आर्युवेदिक डॉक्टर है, एक प्राइवेट अस्पताल में प्रैक्टिस करता है। पुणे में ओमकार से उसकी मुलाकात हुई थी, यहीं से लिंक बनता चला गया।
मांगीलाल, विकास और दिनेश बीवाल कौन हैं?
मंगीलाल बीवाल जयपुर के जमवा रामगढ़ का रहने वाला है। वह दिनेश बीवाल का भाई है, जो पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है। मंगीलाल ने गुरुग्राम के यश यादव से पेपर खरीदा, इसे अपने बेटे विकास और अन्य रिश्तेदारों को दिया। सीकर के कोचिंग सेंटर्स में भी बांटा। परिवार की 2025 वाली NEET सफलता अब शक के घेरे में है। विकास बीवाल, मंगीलाल बीवाल का बेटा है। मेडिकल स्टूडेंट है। वह भी इस केस का आरोपी है। दिनेश बीवाल, मांगीलाल बीवाल का भाई। पैसे के लेन-देन में इस परिवार का बड़ा हाथ है।
यश यादव कौन है?
यश यादव, गुरुग्राम के खेड़ा खुड़रामपुर गांव का रहने वाला है। उम्र सिर्फ 32 साल है। उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह BAMS में एडमिशन ले चुका था। इस साल फिर NEET की तैयारी कर रहा था। उसके पिता तेल मिल चलाते हैं। CBI ने उसे मुख्य आरोपी माना है। उस पर भी बिचौलिया होने का आरोप है। उसने ही लीक पेपर, बीवाल परिवार तक पहुंचाया था।
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शुभम खैरनार कौन है?
शुभम, महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला है। आरोप है कि शुभन ने ही सबसे पहले पेपर लीक किया है। उसे 12 मई को गिरफ्तार किया गया था। वह एक काउंसलिंग बिजनेस चलाता है। खुद को डॉक्टर बताता है। 10 लाख में पेपर खरीदकर उसने 15 लाख रुपये में उसे बेच दिया। टेलीग्राम ग्रुप पर इसी की वजह से पेपर लीक हुआ। पुलिस केस की छानबीन में जुटी है।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
CBI का दावा है कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसमें NTA के भीतर काम करने वाले लोग, दलाल और पैसे देने वाले छात्र शामिल थे। नीट परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। CBI पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही है।
